एक दौर था, जब हमें दादी और नानी की कहानियां सुने बिना नींद ही नहीं आती थी, लेकिन वक़्त बदलता गया और बदलते ज़माने के साथ दादी-नानी की कहानियां भी कहीं लुप्त हो गईं.

लेकिन किसी की वजह से एक बार फिर हम सब दादी-नानी की कहानियों का लुफ़्त उठा सकते हैं. जी हां, बिल्कुल सही सुना आपने.

मिलिए बेंगलुरु की रहने वाली सरला मिनी से. ये पेशे से एक रिटायर्ड टीचर हैं, साथ ही इन्होंने दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान में स्तानक भी किया हुआ है. थोड़ा ठहरिए हम मुद्दे से बिल्लुक नहीं भटके हैं, ये कोई आम महिला नहीं, बल्कि यही वो महिला हैं जो आज कल दादी-नानी की कहानियों कि वजह से खूब चर्चा में हैं.

WhatsApp के ज़रिए परंपरागत कहानियां सुनाने वाली सरला मिनी, देश-दुनिया के करीब 6 हज़ार से अधिक बच्चों की फ़ेवरेट बन चुकी हैं. दरअसल, कुछ समय पहले तक सरला अपने भतीजे-भतीजियों को कहानियां रिकॉर्ड कर, WhatsApp पर भेजा करती थी. अपनी भतीजी पारुल से प्रोत्साहन मिलने के बाद, सरला मिनी WhatsApp पर अपनी कहानियां भेजने लगी और इसी के साथ जन्म हुआ 'कहानीवाली नानी' का और देखते ही देखते सरला मिनी 'कहानीवाली नानी' के नाम से चर्चित हो गईं.

The Hindu से बातचीत के दौरान सरला बताती हैं, 'मैं दुनिया भर की बहुत सारी किताबें पढ़ती हूं, उसके बाद स्क्रिप्ट पर काम करती हूं. साथ ही मैं स्क्रिप्ट अपने भतीजे-भतीजियों को भेजकर उनकी सलाह भी लेती हूं. फिर वो जो भी कमी बताते हैं उन पर काम करती हूं.'

'कहानीवाली नानी' की ये कहानी 8 मिनट की होती है. कहानियां हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं. 4 महीने पहले ही जन्म लेने वाली 'कहानीवाली नानी' को यूके, यूएस, दुबाई, नाईजीरिया, स्विटज़रलैंड और ऑस्ट्रेलिया के करीब 6 हज़ार लोग Subscribe चुके हैं.

इन कहानियों के ज़रिए सरला मिनी उन तमाम बच्चों को उनके दादा-दादी से जोड़ना चाहती हैं, जिन्होंने अपना बचपन दादा-दादी के बिना गुज़ारा. ये कोशिश बच्चों और उनके ग्रैंडपैरेंट्स को करीब लाने की भी है.