अगर बॉलीवुड में महिला गीतकारों की बात करें, तो उन्हें उंगलियों पर गिना जा सकता है. 50 के दशक में सरोज मोहिनी नैय्यर, माया गोविंद, जद्दनबाई, वहीं 90 के दशक में रानी मलिक और आजकल अन्विता दत्त, कौसर मुनीर जैसे नाम ही सामने आते हैं.

पुरुष प्रधान क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मज़बूती से दर्ज करा रही कौसर मुनीर गीतकार के साथ-साथ पटकथा लेखक भी हैं. उन्होंने बतौर गीतकार अपने करियर की शुरुआत टीवी शो 'जस्सी जैसा कोई नहीं' के टाइटल ट्रैक से की थी. तब से अब तक उन्होंने कभी मुड़ कर नहीं देखा.

उन्होंने अब तक कई हिट गानों के बोल लिखे हैं, पर उनके बारे में कम ही लोग जानते हैं. 12 वर्षों से टीवी और फ़िल्मों के लिए पटकथा और गीत लिख रही कौसर अपने संघर्ष के अनुभवों को साझा करते हुए कहती हैं, ''काम पाने के लिए तो संघर्ष नहीं करना पड़ा, लेकिन मेरी ज़िन्दगी में और भी संघर्ष रहे हैं.''

कौसर कहती हैं कि फ़िल्म इंडस्ट्री में काबिलियत की वजह से मुकाम मिलता है, ना कि लिंग और धर्म की वजह से.

ये हैं उनके लिखे कुछ गीत, जो आपने सुने ज़रूर होंगे, पर ये नहीं जानते होंगे कि इनके पीछे शब्दों की जादूगरनी कौसर मुनीर हैं.

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