साजीशेट्टा शायद अब मैं नहीं बचूंगी. मुझे नहीं लगता कि मैं तुम्हें देख पाऊंगी. मैं माफ़ी चाहती हूं. हमेशा बच्चों का ख़्याल रखना और उनको अपने साथ गल्फ़ ले जाना. उनको कभी अपने पिता की तरह अकेले मत छोड़ना. ढेर सारा प्यार..."

ये भावुक कर देने वाला लेटर एक 28 वर्षीय नर्स लिनी पुथुसेरी द्वारा पति. साजीशेट्टा के लिए मरने से पहले में लिखा गया है. लिनी केरल में बतौर नर्स काम कर रही थी, जब उनको निपाह वायरस ने जकड़ लिया और उनकी मौत हो गई. ये लेटर लिनी ने केरल के पेराम्बूर में स्थित कोझिकोड में Perambra Taluk Hospital में अपने आखिरी वक़्त में लिखा था, शायद उनको आभास हो गया था कि अब वो नहीं बचेंगी और जब उनके पति, जो बहरीन में जॉब करते हैं, इंडिया अपने घर आएंगे, तो वो उनसे मिल नहीं पाएंगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले हफ्ते कोझिकोड में निपाह वायरस से पीड़ित दो भाइयों को बचाने के चक्कर में लिनी खुद इस वायरस का शिकार हो गई थी. और बीते रविवार उनकी मौत हो गई.

शादी से पहले लिनी केरल के Chembanoda गांव में रहती थीं, उनके पिता नानू की मौत हो चुकी है. वो अपने माता-पिता की दूसरी बेटी थीं और पिछले 6 सालों से Taluk Hospital में काम कर रही थीं. लिनी के दो छोटे-छोटे बच्चे ह्रितुल और सिद्धार्थ हैं, जो अब अपनी नानी राधा के साथ रह रहे हैं.

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manorama के अनुसार,पिछले गुरूवार को लिनी शाम को अपने छोटे बेटे को दूध पिलाकर हॉस्पिटल के लिए निकल गयीं थीं और 6 बजे उन्होंने हॉस्पिटल में ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी. उसके बाद उनको एक ही परिवार के तीन सदस्यों की देखभाल करने के लिए भेजा गया, जो निपाह वायरस से ग्रसित थे. जिनकी भी इस वायरस के कारण मौत हो गई थी. हॉस्पिटल के सूत्रों के मुताबिक़, लिनी उस दिन पूरी रात उन मरीज़ों के पास ही रहीं, उनकी केयर की और उनसे बात करती रहीं.

सुबह-सुबह लिनी को बुख़ार होने जैसा आभास हुआ जो तेज़ी से बढ़ने लगा. बुखार का पता चलते ही वो तुरंत मेडिकल कॉलेज के लिए निकल गयीं. हॉस्पिटल के रास्ते में उन्होंने अपने पति से वीडियो कॉल करके बात भी की और बताया कि उनकी तबियत ख़राब हो रही है. पर उन्होंने ये नहीं बताया कि ये सीरियस है.

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हालांकि, लिनी की मृत्यु से पहले उनके पति वहां पहुंच गए और ICU में अपनी पत्नी लिनी से मिले और उससे बात भी की.

लिनी ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स को खुद ही बताया कि उसको निपाह इन्फ़ेक्शन हो गया है और उनको इस वक़्त आइसोलेटेड वार्ड में ही होना चाहिए. मगर कितने दुर्भाग्य की बात है कि बीमारी का पता लगने के बाद जब लिनी की मां और बहन हॉस्पिटल पहुंचे, पर इन्फ़ेक्शन का ख़तरा होने के कारण उसने उनको अपने नज़दीक नहीं आने दिया.

लिनी का परिवार नहीं चाहता था कि उनके पड़ोसियों को इन्फ़ेक्शन होने का ख़तरा हो, इसलिए उन्होंने कोझिकोड में ही लिनी का अंतिम संस्कार करने की अनुमति ले ली और बिना देर किये उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जिस कारण पड़ोसी लिनी की अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं हो पाए.

लिनी के पति साजीशेट्टा ने बताया, 'मेरे मना करने के बाद भी वो अस्पताल गयी थी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लिनी ने उनसे बताया था कि अस्पताल में इस समय स्टाफ़ की कमी है और वहां उसकी ज़रूरत है. शायद उसे पता था कि उसका आखिरी वक्त नज़दीक आ गया है.'

ये मंज़र बेहद ही दुखद है कि आज साजीशेट्टा अपने घर के आंगन में आंखों में आंसू लिए बैठा है और उसके हाथों पर लिनी का आख़िरी ख़त है. पास में उसके बच्चे खेल रहे हैं इस बात से बिलकुल अंजान कि अब उनकी मां कभी वापस घर नहीं आएगी.

गौरतलब है कि केरल के कोझिकोड ज़िले में निपाह वायरस फैला हुआ है और इसके चलते कई लोगों की जान भी जा चुकी है. बताया जा रहा है कि एक ख़ास तरह के चमगादड़ से ये वायरस फैल रहा है.

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