2 साल पहले दुनिया के सामने एक तस्वीर आयी थी, अयलान कुर्दी की. इस तस्वीर ने दुनिया को, इंसानियत को झकझोर दिया था.

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अयलान उन सीरियाई रिफ्यूजी बच्चों में से एक था, जो अपने माता-पिता के साथ अपना देश छोड़ कर ग्रीस जा रहे थे. जिस नांव में इन्हें जाना था, वो नांव अपनी Capacity से कुछ ज़्यादा ही भर गयी थी और उसमें से कुछ लोग गिर कर समुद्र में डूब गए. इनमें से एक था अयलान कुर्दी. कुछ दिनों बाद अयलन कुर्दी की लाश समुद्र से बह कर तट पर आई और दुनिया को हिला कर रख दिया.

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इस एक बच्चे की मौत ने सीरिया में चल रहे युद्ध की तस्वीर इस सोई हुई दुनिया को दिखाई. लोग जगे और कहने लगे कि सीरिया में ग़लत हो रहा है, लेकिन असल में न तो किसी देश को इन लोगों की पड़ी है और न ही कोई राष्ट्र इन्हें अपने यहां शरण दे रहा है. वासुदेव कुटुम्बकम की बात करने वाली दुनिया में युद्ध के सताये सीरियाई लोगों के लिए छत नहीं है.

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फिर भी कुछ मुट्ठी भर लोग हैं, जो अपने दम पर इनकी कहानी दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. इन्हीं में से एक हैं जाने-माने नॉवेलिस्ट, खालेद होसैनी. इनके नावेल 'The Kite Runner' को दुनिया भर के लोगों ने पढ़ा है. खालेद ने अयलांन कुर्दी की मौत के दो साल पूरे होने पर एक फ़िल्म रिलीज़ की है, 'Sea Prayer'. इस फ़िल्म की कहानी एक पिता अपने बच्चे को ख़त के रूप में सुना रहा है.

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ये कहानी है एक ख़ूबसूरत सी जगह के खंडहर बनने की. एक पिता अपने बेटे को बता रहा है कि कैसे जिस जगह आज खंडहर और लाशों, धूल और आग के सिवा कुछ नहीं दिखता, वहां कभी जन्नत बसती थी. वो पिता अफ़सोस कर रहा है कि काश उसके बेटे ने उनके घर का वो समय देखा होता, जब वो ख़ुश थे, हंसते थे... जब उनकी सुबह किसी आम सुबह सी होती थी... लेकिन वो दुखी है कि उसके बेटे ने ये सब नहीं सीखा. उसके बेटे ने ये सीखा है कि कैसे आसमान से गिरते आग के गोले दो मिनट में हंसते-खेलते घर को तबाह कर सकते हैं. उसने कभी आबाद रही वो ज़मीन नहीं देखी, उसने वो बंजर धरती देखी है, जहां ख़ून के निशां और उनमें लिपटी लाशें पड़ी होती हैं.

इस पिता को अफ़सोस है कि उसके बेटे ने सिरिया को कभी जन्नत के रूप में नहीं देखा.

Sea Prayer, सीरिया के हालात पर बात करता है एक Virtual Reality विडियो है. ये कहानी है उन हज़ारों सीरियाई रिफ्यूजियों की, जो एक बेहतर घर की तलाश में समंदर तक पहुंचते हैं. इनमें से कई वहीं डूब कर मार जाते हैं. कभी वो रास्ते में मरते हैं, कभी वो दूसरे देशों की दहलीज़ पर कदम रखते ही मार दिए जाते हैं. ये सीरिया की सच्चाई है.

देखिएगा ये विडियो, बस 7 मिनट का है. ज़रा सी इंसानियत है, तो शर्म आने लगेगी.

Source: The Guardian