कुछ लोग मौत को काफ़ी करीब से देखने के बाद भी ज़िंदगी जीना नहीं छोड़ते, ऐसे ही लोगों में 19 साल की श्रेया सिद्दनागौड़ भी है. दरअसल, बीते साल श्रेया पुणे से मनीपाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के लिए सफ़र कर रही थीं, अचानक बस एक्सीडेंट में वो बुरी तरह ज़ख्मी हो गई, हादसे में श्रेया के दोनों हाथ भी बेकार हो गए थे.

इतने बड़े हादसे का शिकार होने का बावजूद भी श्रेया ने ज़िंदगी से हार नहीं मानी और ठीक एक साल बाद, कोच्चि के डॉक्टरों की टीम ने उनके हाथों का सफ़ल ऑपरेशन कर, उसे नया जीवनदान दे दिया.

श्रेया को ये जीवनदान मिला 20 साला के सचिन की वजह से. एर्नाकुलम के राजगिरी कॉलेज में B.Com सेकंड इयर के छात्र सचिन एक रोड एक्सीडेंट के बाद से दिमागी चोट से जूझ रहा है. ये चोट इतनी गहरी है कि डॉक्टर्स ने उसे ब्रेन-फ्रीज़ घोषित कर दिया है.

अपनी ख़ुशी का इज़हार करते हुए श्रेया कहती हैं, 'मुझे अपनी हालत पर विश्वास नहीं हो रहा था, एक पल के लिए तो मानों मेरी दुनिया ही ख़त्म हो गई, लेकिन जैसे ही मेरी मां ने मुझसे ये बताया कि भारत में तुम्हारा हैंड ट्रांसप्लांट सफ़ल रहा, उस वक़्त मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. सर्जरी के बाद मुझे ताकत और आशा मिली, मेरी विकलांगता अस्थायी दिख रही है. एक दिन मैं फिर से सामान्य जीवन जी पाउंगी.'

हैंड ट्रांसप्लांट Amrita Institute Of Medical Sciences के Plastic And Reconstructive Surgery Department हेड डॉक्टर Subrahmania Iyer के नेतृत्व में किया गया. इस ऑपरेशन में 20 सर्जन और 16 एनस्थेटिस्ट शामिल थे, करीब 13 घंटों की मशक्कत के बाद डॉक्टर श्रेया को उसकी ख़ुशियां वापस लौटाने में कामयाब रहे.

फ़िलहाल श्रेया को अस्पताल से छुट्टी दे गई है, हम आशा करते हैं कि आने वाले एक डेढ़ साल में श्रेया सामान्य ज़िंदगी जीने लगेगी.

सफ़ल सर्जरी के बाद श्रेया ने डोनर सचिन और उसके परिवारों, अस्पताल और डॉक्टर्स का शुक्रिया भी अदा किया.

Source : thequint