कोलकाता जाते ही जो चीज़ आपका सबसे पहले स्वागत करती है, वो हैं पीले रंग की चमचमाती टैक्सीज़. शहर के हर हिस्से को यही टैक्सी जोड़ती है. गाज़ी जलालुद्दीन भी इन्ही हज़ारों टैक्सीज़ में से एक चलाते हैं. लेकिन इस कारण वो चर्चा का विषय नहीं बने हैं, बल्कि टैक्सी के साथ-साथ वो दो स्कूल भी चलाते हैं, जहां बच्चों को मुफ़्त शिक्षा दी जाती है.

गाज़ी गाज़ी जलालुद्दीन का एक सपना है कि कोई भी बच्चा उनकी तरह अशिक्षित न रहे. 63 साल के गाज़ी पश्चिम बंगाल के जयनगर जिले में दो स्कूल चलाते हैं. उनकी टैक्सी की ज़्यादातर कमाई इसी स्कूल को चलाने में जाती है.

गाज़ी बताते हैं कि वो पढ़ने में काफी अच्छे थे, लेकिन घर के हालातों के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी. हालात इस कदर खराब थे कि इन्हें खाने के लिए भीख तक मांगनी पड़ी थी. थोड़े बड़े होने पर उन्होंने हाथ रिक्शा भी खींचा. 1977 में उन्होंने गाड़ी चलानी सीखी और टैक्सी ड्राइवर बन गए. इसके बाद उन्होंने अपने ग्राहकों से स्कूल के बारे में चर्चा शुरु की और उन्हीं से डोनेशन की बात भी करने लगे. कुछ लोगों ने गाज़ी की मदद भी की.

उन्होंने इस स्कूल को बढ़ाने के लिए बेरोज़गार लोगों को फ़्री में ड्राइविंग सिखाई. ताकि वो इससे पैसे कमा सकें और इस स्कूल को चलाने में भी उनकी मदद कर सकें.

सालों की मेहनत के बाद 1998 में गाज़ी साहब ने अपना पहला स्कूल खोला. शुरु में इसमें 22 छात्र और 2 टीचर थे. इस स्कूल के खुलने के बाद उन्हें कई पेसेंजर्स से भी सपोर्ट मिला. स्कूल की बात सुन कर कई पेसेंजर्स ने उनकी मदद की.

आज गाज़ी साहब दो स्कूल चला रहे हैं. इसमें करीब 1000 से ज़्यादा बच्चे पढ़ते हैं. बीते साल गाज़ी साहब को इस स्कूल के लिए 'Sundarban Orphanage Mission' ने सम्मानित भी किया है.

ऐसे लोग ही हैं, जिन्हें देख कर लगता है कि आज भी दुनिया में इंसानियत ज़िंदा है. गाज़ी साहब के इस बेहतरीन काम के लिए पूरी ग़ज़ब पोस्ट टीम उनको दिल से सलाम करती है.

Image Source: thelogicalindian