भ्रष्टाचार नाम की बीमारी हमारे समाज में इतनी बुरी तरह फैली है कि इसके इलाज के लिए चाहे कितने भी जतन कर लिए जायें, कोई न कोई छूट ही जाता है. बात ये भी है कि इसको बढ़ावा देने में जितना सरकारी तंत्र का हाथ है, उतना ही आम जनता का भी. जब तक जनता इसको बढ़ावा नहीं देगी, तब तक मजाल ही नहीं है कि ये घुन किसी विभाग में घर कर जाये. इसी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता आगे आया है. यह कार्यकर्ता भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए धर्म की शरण में जा पहुंचा है. करप्शन को मिटाने के लिए इस व्यक्ति ने एक मंदिर का निर्माण करवाया है.

कानपुर विश्वविद्यालय के ठीक पीछे बने इस मंदिर का नाम है 'भ्रष्ट तंत्र विनाशक शनि मंदिर'. मंदिर के निर्माण के बाद इसका लोकार्पण भी किसी बड़े आदमी ने नहीं, बल्कि पवन राणे बाल्मीकि नाम के एक निशक्त व्यक्ति ने किया था. इस मंदिर में मूर्तियों को भी किसी लॉजिक के साथ लगाया गया है. शनिदेव की तीन मूर्तियों और ब्रह्मा जी की मूर्ति को ऐसे रखा गया है कि ब्रह्मा जी शनिदेव को देख रहे हैं. साथ ही मंदिर में एक मूर्ति हनुमान जी की भी लगाई गई है. भगवान की मूर्तियों के अलावा मंदिर में अधिकारियों, मंत्रियों, नेताओं और इलाहाबाद न्यायालय के न्यायाधीशों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं. ये तस्वीरें इस तरह से लगाई गई हैं कि देखने वालों को ऐसा प्रतीत होता है कि शनिदेव की सीधी नज़र इन पर है. इसका मकसद ये है कि ऐसे अधिकारी जनता विरोधी फ़ैसले लेने से पहले शानिदेव के गुस्से का शिकार होने से डरें.

इस खास मंदिर में आम नागरिक ही जा सकते हैं. भ्रष्ट, अधिकारियों, मंत्रियों और नेताओं का प्रवेश यहां वर्जित है. ये भी प्रावधान है कि आने वाले 20 वर्षों में अगर हालात सुधरे, तो इस वर्जित वर्ग को भी प्रवेश दिया जाएगा. अनोखी बात ये है कि इस मंदिर में शानिदेव के ऊपर तेल चढ़ाना, प्रसाद चढ़ाना और घंटी बजाना मना है. पर लोग लौंग, इलाइची और काली मिर्च के साथ मिट्टी के दिये जला सकते हैं. शराबियों का यहां प्रवेश, तम्बाकू और खैनी खाना, थूकना इस मंदिर में घृणित काम की श्रेणी में रखे गये हैं.

इस मंदिर का निर्माण करवाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रौबी शर्मा का ऐसा मानना है कि इस मंदिर के निर्माण से लोग थोड़े जागरूक होंगे और वो अधिकारियों को भगवान समझने की गलती नहीं करेंगे. इस मंदिर में भ्रष्ट लोगों का बहिष्कार कर ये दिखाया जा रहा है कि चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी हो, भगवान के सामने उसकी भ्रष्टता माफ़ नहीं होती.

Source: Jagran