वो दिन शायद मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी. गांव की गलियों में दोस्तों के साथ खेल रही थी. वो दौड़ते-दौड़ते मुझ से ज़रा आगे निकल गये थे और मैं पीछे रह गई. मैं सांस लेने के लिए रुकी थी... कुछ पल बीते होंगे कि पीछे से किसी ने मुझे उठा लिया. एक हाथ मेरे सीने पर और दूसरा हाथ मेरी फ़्रॉक के नीचे से होते हुए 'वहां' तक पहुंच गया. मैं चीख भी नहीं पाई, पर कनखियों से देख लिया था कि वो पड़ोस के ही एक भैया थे. मैं 8 साल की थी.

Source: Odisha UN Times

इस तरह की घटना पहली बार घटी थी मेरे साथ. न मैं रो पाई और न ही किसी से कह पाई.

स्कूल से आते-जाते भी गंदे गानों, सीटियों, हाथ पकड़ने की कोशिशों से सरोकार हुआ. तब तक इतना समझ में आ गया था कि इन सब के बारे में घर पर बात की जा सकती है. समाधान के रूप में ग्रुप में स्कूल जाना और लौटना शुरू किया. उस वक़्त घर पर टेलिफ़ोन हुआ करता था. टेलिफ़ोन बड़ी मज़ेदार चीज़ लगी, लेकिन टेलिफ़ोन के साथ ही शुरू हुआ रात के 3 बजे आने वाले फ़ोन कॉल्स का सिलसिला. परेशान होकर टेलिफ़ोन का रीसिवर हटाकर रखा जाने लगा.

कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते मोबाईल फ़ोन और सोशल मीडिया ज़िन्दगी का हिस्सा बन गये. अब Molestation, Abuse के भी 'तौर-तरीके' बदल गए थे. शहर बदलने के कारण सिम कार्ड भी नया लेना पड़ा, पर मुझे क्या पता था कि 50-50 रुपये में लड़कियों के नंबर भी बेचे जाते हैं. नये सिम पर अनजान लोगों के कॉल्स और अजीब-अजीब बातों से परेशान होकर फ़ोन बंद रखने का दौर भी शुरू हुआ. वो लड़के ग्रुप में फ़ोन करते, अजीब-अजीब आवाज़ें निकालते, हंसते, मेरे नाम से गालियां देते (ख़ुद के लिए 'धंधेवाली' शब्द पहली बार फ़ोन पर ही सुना था). पैसे मांगना, फ़ोन पर पॉर्न सुनाना भी जारी था. न इतनी हिम्मत थी और न जानकारी कि मैं उस वक़्त पुलिस में रिपोर्ट लिखवाती.

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3 दिन के मानसिक शोषण के बाद मैंने सिम बंद करवाया और एक बड़ी दुकान से सिम कार्ड ख़रीदा. उसके बाद इस तरह की कॉल्स वाली समस्या नहीं आई. बाद में पता चला कि उत्तर प्रदेश में ये एक बहुत बड़ा बिज़नेस है. चंद रुपयों के लिए दुकान वाले लड़कियों के नंबर लड़कों को बेच देते हैं.

अपने साथ हुई ये घटनायें मैंने यूं ही शेयर की, उसके पीछे वजह था Truecaller App का सर्वे. देश भर में 15 से 35 आयु वर्ग की 2000 महिलाओं पर ये सर्वे किया गया. इस सर्वे के हिसाब से, 2000 में से 78% महिलाओं ने स्वीकारा कि उन्हें अनजान नंबरों से अश्लील कॉल्स आते हैं. 82% महिलाओं ने माना कि अनजान नंबरों से उन्हें हर हफ़्ते Sexually Explicit वीडियोज़ और फ़ोटोज़ मिलते हैं.

Source: Psmag

इस रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के जयपुर में महिलाओं को सबसे ज़्यादा Sexually Offensive कॉल्स आते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि सिर्फ़ 10% महिलाएं ही ऐसी कॉल्स की शिकायत दर्ज करती हैं और 7% महिलाओं ने सोशल मीडिया पर कॉलर्स की पोल खोली. मतलब साफ़ हैं, ज़्यादातर महिलाएं इन घटनाओं को नज़रअंदाज़ ही करती हैं.

कुछ नहीं से बेहतर है कुछ करना

Stalking किसी भी तरीके (रास्ते पर, फ़ोन पर, E-mail द्वारा, सोशल मीडिया पर) की क्यों न हो, एक अपराध है. ये बात दिमाग़ में बैठा लें. 'ऐसा ही होता है' वाला रवैया आज ही छोड़ दें. किसी भी Stalker को 3 साल तक की जेल हो सकती है. National Commission for Women पर आप Stalking की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं. सिर्फ़ ब्लॉक कर देना ही हर बार समस्या का हल नहीं होता. आपने तो ब्लॉक कर दिया, पर एक बार सोचिये कि अपराधी कितनी महिलाओं को अपना निशाना बना सकता है?

यहां दर्ज करा सकती हैं शिकायत- http://ncw.nic.in/onlinecomplaintsv2/frmHome.aspx

Source: Reality Crazy

फ़ोन तक ही नहीं सीमित है Stalking

ये बातें सिर्फ़ फ़ोन तक ही सीमित नहीं हैं. सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी महिलाओं को ऐसे घटिया लोगों का सामना करना पड़ता है. बहुत कम होंगी ऐसी महिलाएं, जिन्हें फ़ेसबुक पर Penis, Porn Clips की तस्वीरें न मिली हों. Cyber Cell में आप ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं. और कुछ नहीं, तो उस इंसान को एक चेतावनी ज़रूर भेजी जाती है. दोषी पाये जाने पर सज़ा का भी प्रावधान है.

देश के विकास की जब बात हो, तो महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर विषय है. दुख की बात है कि इसे कागज़ पर तो काफ़ी तवज्जो दी जाती है, पर ज़मीनी हक़ीक़त काफ़ी अलग होती है. ज़मीनी हक़ीक़त से हम आप अच्छे से वाकिफ़ हैं. 

Feature Source- Performance Sales And Training