जंग के मैदान में सटीक निशाने से तहलका मचाने वाली 'थ्री नॉट थ्री' रायफ़ल अपने 161 साल के शानदार सफ़र के बाद रिटायर हो गई हैं. कई विभागों से पहले ही रिटायर हो चुकी ये राइफ़लें अब 29 नवंबर 2019 से इतिहास बनाने जा रही हैं. 74 सालों से यूपी पुलिस का मुख्य हथियार रही '303' रायफ़लों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गयी है.

यूपी पुलिस के साथ रहा लंबा सफ़र

ये हथियार यूपी पुलिस को साल 1945 में सौंपा गया था. इनसे पहले '410' मस्कट राइफ़ल का प्रयोग किया जाता था. इसके बाद 80 के दशक में पुलिस विभाग को 'SLR' राइफ़लें मिली थीं. 74 सालों तक इन राइफ़लों ने अपराधियों से जनता की रक्षा करने में मदद की. इतने लंबे समय तक अपराधियों को चुन-चुनकर मार गिराने वाली ये 'थ्री नॉट थ्री' राइफ़लें अब हमेशा के लिए बंद होने जा रही हैं. यूपी पुलिस के जवानों को अब 'INSAS' राइफ़लें दी जाएंगी.

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ऐसा रहा '303' रायफ़ल का इतिहास

'थ्री नॉट थ्री' रायफल को पहली बार साल 1857 में जवानों को थमाई गई थीं. इस राइफ़ल का इस्तेमाल सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भी हुआ था. इस दौरान ये राइफ़लें अत्याधुनिक हथियारों में से एक थी. साल 1962 में भारतीय सैनिकों ने इसी रायफ़ल से चीन से युद्ध लड़ा था.

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'303' रायफ़ल की काबिलियत

इस राइफ़ल की मारक क्षमता लगभग 2 किलोमीटर थी. इसमें मैग्जीन लगाकर एक साथ छह फ़ायर करने की क्षमता थी. यदि गोली शरीर को छूते हुए निकल गई तो भी काफ़ी नुकसान पहुंचाती थी. 70 के दशक में '303' रायफ़ल को मॉडिफ़ाई कर सेमी ऑटोमेटिक बनाया गया था.

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ये हैं हटाए जाने का मुख़्य कारण

दरअसल, टेक्नोलॉजी के इस दौर में अपराध को रोकने के लिए '303' राइफ़लें उपयोगी साबित नहीं हो पा रही थीं. इन रायफ़लों के पुर्जों की मरम्मत में दिक्कत आ रही थी. ये बोल्ट एक्शन वाली रायफ़लें थीं, एक बार फ़ायर करने के बाद रुकना पड़ता था. '303' रायफ़ल को दोनों हाथों से संभालना पड़ता है, जबकि अब फर्राटा भरते वाहनों पर एक हाथ से चलाने वाले असलहों की ज़रूरत रहती है. इसीलिए इन रायफ़लों को पुलिसकर्मियों के कंधों से उतारने का फ़ैसला लिया गया है.

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यूपी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 63 हजार 'INSAS' और 23 हज़ार 'SLR' राइफ़लें थानों को दी जा चुकी हैं. पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे '303' का प्रयोग न करें.