अपने बच्चों की ख़ुशियों के लिए मां-बाप कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. ख़ुद के गम को भूलकर वो अपने बच्चों के गम को सबसे पहले रखते हैं. गोवा के रहने वाले 44 वर्षीय बिपिन कदम (Bipin Kadam) भी ऐसे ही पिता हैं, जिन्होंने अपने बेटी की ख़ुशी के लिए कुछ ऐसा कर दिखाया जो असंभव सा लगता है. दरअसल, बिपिन कदम ने एक ऐसा रोबोट (Robot) बनाया है जो बच्चों को मां की कमी महसूस नहीं होने देगा. इसलिए उन्होंने इसका नाम मां रोबोट (Ma Robot) रखा है.

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बिपिन कदम (Bipin Kadam) द्वारा रोबोट बनाने की ये कोशिश ख़ास इसलिए भी है क्योंकि वो केवल 10 वीं पास हैं. एक आम आदमी का किसी एक्सपीरिएंस Robotics Engineer की तरह रोबोट बनाना अपने आप में अनोखी बात है. अत्याधुनिक तकनीक से बनाया गए इस रोबोट को देखकर कोई नहीं कह सकता कि बिपिन महज़ दसवीं पास हैं. बिपिन का बनाया ‘मां रोबोट’ इस बात का सबूत है कि किसी काम को करने के लिए बड़ी डिग्री या साधन के बजाय, उसे करने की इच्छा सबसे ज़्यादा ज़रूरी है.

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द बेटर इंडिया के मुताबिक़, बिपिन मूल रूप से महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग ज़िले के रहने वाले हैं. उनके पिता गांव में खेती करते हैं. 10वीं पास करने के बाद पैसों की कमी के चलते वो आगे की पढ़ाई नहीं पाए. इसके बाद बिपिन गोवा की एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में काम करने आ गए. शुरुआत में उन्होंने एक हेल्पर के तौर पर काम किया. लेकिन अपने हुनर के दम पर जल्द ही सफलता हासिल कर ली. उन्होंने ख़ुद की इच्छाशक्ति और मेहनत से हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर का ज्ञान हासिल किया. बिपिन को कंप्यूटर का भी अच्छा ख़ासा ज्ञान है. आज वो कंपनी में CNC Programmer और 3D Designer के पद पर काम कर रहे हैं. कंपनी के इंजीनियर भी 3D डिज़ाइनिंग और मशीन की जानकारी लेने के लिए उनके पास आते हैं.

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बिपिन कदम (Bipin Kadam) गोवा की एक मशीन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में काम करते हैं और उन्हें मशीनों से उन्हें बेहद लगाव है. बिपिन कदम ने 3 साल पहले अपने थोड़े से ज्ञान का इस्तेमाल करके एक ऐसा रोबोट बनाया, जो आज उनके परिवार के लिए वरदान बन गया है. उन्होंने मात्र 12 हज़ार रुपये ख़र्च करके इस रोबोट को अपने घर पर ही बनाया है. ये एक ऐसा रोबोट है, जो एक इशारे पर आपको चम्मच से खाना खिला सकता है.

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दरअसल, बिपिन कदम (Bipin Kadam) की एक बेटी है, जो बचपन से ही दिव्यांग है. लेकिन दिव्यांग होने की वजह से 17 साल की प्राजक्ता का दिमाग 2 साल के बच्चे जैसा है. प्राजक्ता को खाने से लेकर अपने रोज़ के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसे में हर पिता की तरह बिपिन से भी बेटी का दुःख देखा नहीं जाता था. बेटी के लिए कुछ करना चाहते थे.

बिपिन कदम (Bipin Kadam) चाहते थे कि जब पूरी दुनिया आत्मनिर्भर होने के बारे में बात करती है, तब ऐसे में उनकी बेटी खाने के लिए भी किसी दूसरे पर निर्भर क्यों रहे. बेटी की इसी लाचारी ने उन्हें ‘रोबोट’ बनाने के लिए प्रेरित किया. बिपिन के दिमाग में हमेशा मशीन और डिज़ाइनिंग चलती रहती थी. वो एक ऐसी मशीन बनाना चाहते थे जो उनकी बेटी की तकलीफ़ को दूर कर दे. ऐसे में साल 2019 में उन्होंने अपनी 12 घंटे की ड्यूटी के बाद घर पर ‘रोबोट’ बनाने का काम शुरू किया. इस तरह मात्र 4 महीनों में उन्होंने ‘रोबोट’ बना दिया और इसे ‘मां रोबोट’ नाम दिया.

कैसे काम करता है ये रोबोट?

ये ‘रोबोट’ रेकॉर्डेड आवाज़ के ज़रिए काम करता है. बिपिन ने इसमें 3 से 4 कटोरे और 1 चम्मच लगाई हैं. इस रोबोट की मेमोरी में उन्होंने अलग-अलग खाने के नाम फिट कर दिए हैं. इस दौरान जब ‘रोबोट’ को चावल खिलाने का आदेश दिया जाता है तो ये चावल खिलाने लगता है. इसी तरह बाक़ी की चीज़ें भी रेकॉर्डेड हैं. इसका दूसरा मॉडल पैरों से बटन के ज़रिए चलता है. इसमें बैठने के लिए एक सीट भी दी गई है. ऐसे में ये ‘रोबोट’ इंसान को एहसास कराएगा कि जैसे वो मां की गोद में बैठकर खाना खा रहा हो.

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आज इस मशीन (रोबोट) का इस्तेमाल दिव्यांगजनों के लिए बरदान साबित हो रहा है. वो इस रोबोट के इस्तेमाल से आत्मनिर्भर बन सकते हैं.