Hindenburg Zeppelin एक ऐसी फ़्लाइट जो इतनी भव्य और सुंदर है कि जिसे देखकर आप उसमें सैर करना चाहेंगे. 20वीं. शताब्दी में शिप के ज़रिए अटलांटिक की सैर करना संभव हो चुका है. मगर बात की जाए, 1919 की ब्रिटिश एविएटर्स के बाद जॉन एल्कॉक और आर्थर ब्राउन ने जून 1919 में पहली नॉन-स्टॉप ट्रान्साटलांटिक फ़्लाइट बनाई, जो 1928 आते-आते काफ़ी बदल गई. इसे 11 अक्टूबर 1928 को, ह्यूगो एकेनर, ने DELAG के संचालन के हिस्से के रूप में Graf Zeppelin हवाई पोत की कमान संभाली और पहली नॉन-स्टॉप ट्रान्साटलांटिक यात्री उड़ानें शुरू हुईं.

इसके बाद, DELAG ने Graf Zeppelin को उत्तरी अटलांटिक में Frankfurt-am-Main से लेकहर्स्ट तक की यात्रा के लिए नियमित रूप से चालू किया. 1931 में दक्षिण अटलांटिक मार्ग से एक यात्रा शुरू की गई, जो Frankfurt और फ़्रेडरिकशफ़ेन से रेसिफ़ और रियो डी जियोरो तक की यात्रा थी. 1931 में नियमित रूप से चलने के बाद 1937 तक इस फ़्लाइट ने दक्षिण अटलांटिक को 136 बार पार किया. यात्रा को प्रत्येक दिशा में लगभग चार दिन लगते थे और इसका एक साइड का किराया लगभग 400 डॉलर था, जो आज के दौर में लगभग 7,050 डॉलर है.

1936 में, DELAG ने Hindenburg Zeppelin को पेश किया, जिसने 36 अटलांटिक क्रॉसिंग बनाए.

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इस Hindenburg Zeppelin से थोड़ा क़रीब से रू-ब-रू कराते हैं हम आपको. आज हम आपके लिए उसी Hindenburg Zeppelin की कुछ पुरानी तस्वीरें लेकर आए हैं. इसका इंटीरियर Fritz August Breuhaus ने किया था. इन्होंने पुलमैन कोच, ओशन लाइनर्स, जर्मन नेवी के युद्धपोतों को भी डिज़ाइन किया था.

डाइनिंग रूम

Hindenburg Zeppelin का डाइनिंग रूम 13 फ़ीट चौड़ा और 47 फ़ीट लंबा था. इसकी दीवारों पर प्रोफ़ेसर Otto Arpke द्वारा रेशम वॉलपेपर पर डिज़ाइन की गई है. इसमें Graf Zeppelin की दक्षिण अमेरिका की उड़ानों के दृश्यों को दर्शाया गया था.

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लाउन्ज

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इसका लाउन्ज लगभग 34 फ़ीट लंबा है. इसकी कारीगरी भी प्रोफ़ेसर Otto Arpke ने ही की थी. 1936 में इस फ़्लाइट लाउन्ज में 356 पाउंड का पियानो था, जो कि डुरलुमिन से बना था और पीले रंग के पिस्किन से ढका था.

राइटिंग रूम

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यात्री कक्ष

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Hindenburg Zeppelin को दुनिया का पहले हवाई होटल कहा गया था. ग्राफ़ ज़ेपेलिन के विपरीत, इसमें पैसेंजर के रहने के लिए एक रूम था. यात्री स्थान दो हिस्सों में फैला था, जिसे 'ए डेक' और 'बी डेक' के रूप में जाना जाता था. विमान के ए डेक को 25 डबल-बर्थ केबिन के रूप में डिजाइन किया गया था, जिसमें 50 यात्री थे. इसके उद्घाटन के बाद, 1936 में 20 अतिरिक्त यात्रियों के लिए 9 और केबिनों को बी डेक में जोड़ा गया था. केबिनों की दीवारों और दरवाज़ों को कपड़े से ढके हल्के फ़ोम की एक पतली परत से बनाया गया था. हालांकि, किसी भी केबिन में वॉशरूम की सुविधा नहीं थी. Charles Rosendahl के अनुसार, पुरुष और महिला दोनों शौचालय नीचे बी डेक में थे.

स्मोकिंग रूम और बार

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इस हाइड्रोज़न एयरशिप में सबसे चौंकाने वाली जगह इसका स्मोकिंग रूम था. हालांकि, इसे वातावरण के दबाव से अधिक रखा गया था, इसलिए अगर लीक होने की स्थिति आती है, तो कोई भी इस कमरे में नहीं जा सकता था. इसके अलावा, इसमें बार को जहाज के बाकी हिस्सों से एक डबल-डोर एयरलॉक द्वारा अलग किया गया था. एक इलेक्ट्रिक लाइटर था.

कंट्रोल कार, उड़ान उपकरण और उड़ान कंट्रोल केबिन

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क्रू एरिया

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Hindenburg Zeppelin तीन गुना लंबा और बोइंग 747 से दोगुना लंबा था

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6 मई 1937 को, जर्मन यात्री हवाई जहाज एलजेड 129 Hindenburg में आग लग गई. इसमें 97 लोग (36 यात्री और 61 चालक दल) सवार थे. साथ ही इसमें 36 घातक (13 यात्री और 22 चालक दल, 1 कार्यकर्ता ज़मीन पर) थे. इस भयानक दुर्घटना के गवाह उस टाइम की न्यूज़रील कवरेज, तस्वीरों और लैंडिंग के क्षेत्र में हर्बर्ट मॉरिसन के रिकॉर्ड किए गए रेडियो का कार्यक्रम था. इस दुर्घटना ने यात्रियों में हवा यात्रा के प्रति विश्वास को चकनाचूर कर दिया और इस वजह से उस दौरान हवाई जहाज़ के दौर का अचानक अंत हो गया था.

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