पीएम मोदी ने इस गांधी जयंती से लोगों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक न इस्तेमाल करने की अपील की है. लेकिन प्लास्टिक हमारी ज़िंदगी में इस कदर पैर पसार चुका है कि उसे छोड़ने में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं. ऐसे लोगों को सिक्किम के एक गांव से सीख लेनी चाहिए, जिसने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर बैन लगाने की दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई है.

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एक रिसर्च के मुताबिक, भारत में हर साल तक़रीबन 6.5 मिलियन टन प्लास्टिक इस्तेमाल किया जाता है. इसमें से सिंगल यूज़ प्लास्टिक का हिस्सा 45 फ़ीसदी होता है. ये प्लास्टिक एक बार इस्तेमाल होने के बाद सीधा कचरे के डिब्बे में नज़र आती है.

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इस तरह ये प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम से कम करने की कोशिश में सबसे बड़ी बाधा है. इस बाधा को दूर करने की इच्छाशक्ति दिखाई है, सिक्किम के गांव लाचुंग(Lachung) ने. यहां के लोगों ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है.

फ़ेमस टूरिस्ट प्लेस होने के चलते यहां पर लोग अकसर पानी की बॉटल, प्लास्टिक के चम्मच, जैसे सिंगल यूज़ प्लास्टिक लेकर आते हैं. ऐसे लोगों को पहले ही एक चेक पॉइंट पर तलाशी लेकर उन्हें इनका इस्तेमाल न करने की जानकारी दे दी जाती है.

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अगर फिर भी कोई टूरिस्ट ऐसा करता पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है. ये नियम इस गांव के लोगों ने 3 साल पहले बनाया था. गांव के सभी लोग इसका पालन करते हैं. यही नहीं, गांव वाले सिंगल यूज़ प्लास्टिक को घर में फिर से किसी न किसी रूप में इस्तेमाल भी कर रहे हैं.

सिंगल यूज़ प्लास्टिक को बैन करने की मुहिम को अगर सफ़ल बनाना है, तो हमें इस गांव से सीखना होगा. अगर पूरा देश ठान ले कि उन्हें सिंगल यूज़ प्लास्टिक को इस्तेमाल नहीं करना है, तो इस समस्या से निजात पाया जा सकता है.

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