कभी-कभी हम जो सोचते हैं वैसा नहीं होता, पर जैसा होता है वो अच्छे के लिये होता है. आज आपको मिलवाते हैं एक ऐसी लड़की जिसके माता-पिता उसे पढ़ा-लिखा कर कुछ बनाना चाहते थे, पर हालातों ने उसे खेती-बाड़ी करने पर मज़बूर किया और आज वो पिता से कई गुना ज़्यादा कमा रही है.

नाम है ज्योत्सना!

बात 1998 की है जब ज्योत्सना 6 साल की थी और उसका भाई लगभग 1 वर्ष का होगा. एक एक्सीडेंट में उसके किसान पिता का पैर टूट गया. ऐसे में घर चलाने की सारी ज़िम्मेदारी ज्योत्सना की मां लता पर आ गई. इस दौरान लता के पास खेती करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं था और वो जब भी खेतों में काम करने जाती ज्योत्सना को साथ ले जाती. वहीं जब ज्योत्सना 12 साल की हुई, तो उसे खेती की अच्छी जानकारी हो चुकी थी. यही नहीं, वो खेतों में जाकर अपनी मां की मदद भी करती.

'द बेटर इंडिया' से बातचीत के दौरान ज्योत्सना ने बताया कि वो स्कूल जाने से पहले और स्कूल से आने के बाद अपनी मां के साथ खेतों में काम करवाती थी. इतना ही नहीं एग्ज़ाम के समय वो खेतों में ही पढ़ाई करती. इसके साथ ही कभी-कभी मां को आराम देने के लिये वो खेतों का पूरा काम भी संभालती. ख़ैर, 2005 तक हालातों में सुधार हुआ और उसके पिता विजय दौंड ठीक होकर फिर से खेतों में वापस लौट आये. परिवार में ख़ुशियां लौटी ही थीं कि 2010 में लोनवाड़ी में आई अचानक बारिश से विजय की अंगूर की फ़सल तबाह होने लगी. वहीं जैसे ही वो खेती को नुकसान से बचाने के लिये उर्वरक लेकर लौट रहे थे, तो उनका पैर स्लिप हो गया और फिर से बेड पर आ गये.

इधर ज्योत्सना पढ़ाई के साथ-साथ खेती का काम भी सीख चुकी थी. ज्योत्सना ने कंप्यूटर में मास्टर्स किया और कॉलेज की तरफ़ से नासिक की सॉफ़्टवेयर कंपनी में उसकी जॉब लग गई. हांलाकि, ज्योत्सना का नौकरी में मन नहीं लगा और करीब डेढ़ साल तक काम करने के बाद उसने नौकरी छोड़ फिर से खेती का काम संभाल लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर अंगूर के गुच्छे में 15-17 अंगूर होते हैं, पर ज्योत्सना की खेती में 25-30 अंगूर होते हैं. इस तरह से आज ज्योत्सना अपने पिता से दोगुनी आय करने में सक्षम है. खेती के अलावा वो पास के स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाती भी है. साथ ही 2018 में उसे ‘Krishithon Best Woman Farmer Award’ से भी सम्मानित किया गया.