बड़े अक़सर बच्चों को बच्चा समझकर टरका देते हैं. आराम से बोल देते हैं, बच्चे हो तुम नहीं समझोगे या तुमसे नहीं होगा.


बच्चे ठहरे बच्चे, क्या ही कर सकते हैं. चुप बैठ जाते हैं. हक़ीक़त इससे थोड़ी अलग है. बड़ों को भी ऐसी बहुत सी चीज़ें नहीं आती हैं. इनमें से कुछ चीज़ें तो ऐसी हैं जो बचपन में ही आ जानी चाहिए थी.

हमने कुछ बड़ों से पूछा कि वो कौन सी बातें हैं जो न तो बचपन में आती थी और न ही अब आती है. जवाब ये रहे-

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