ये समाज कितान भी मॉडर्न हो जाए, लेकिन जब बात लड़के और लड़की की आती है तो आज भी भेदभाव होता ही है. एक लड़के की परवरिश में जितना खुलापन होता है, एक लड़की परवरिश में उतनी ही बंदिशें. कुछ ही लड़कियां होती हैं जिन्हें खुले विचारों वाले पेरेंट्स मिलते हैं, जो हर वो चीज़ कर पाती हैं, जो वो करना चाहती हैं. मगर कभी सोचा है जिन लड़कियों को हर वक़्त ताने सुनने पड़ते हैं उनपर क्या बितती होगी?

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इस तरह के व्यवहार से लड़कियों के दिमाग़ पर गहरा असर पड़ता है, उन्हें पूरी ज़िंदगी इन 5 तरह की समस्याओं से गुज़रना पड़ता है.

1. सबसे Attach होने में टाइम लगता है

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जब बच्चे को अपने पेरेंट्स से प्यार और जुड़ाव महसूस नहीं होता है, तो वो दूसरों से भी जल्दी Attach नहीं हो पाता है. इसका सबसे ज़्यादा असर लड़कियों पर पड़ता है. क्योंकि लड़कियां, लड़कों के मुकाबले ज़्यादा इमोशनल होती हैं. अगर वो बचपन से ही अपने पैरेंट्स के साथ जुड़ा हुआ महसूस नहीं करेगी, तो उसे बड़े होने पर दूसरों से जुड़ने में दिक्कत होगी.

2. Trust नहीं होता जल्दी

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अगर बेटियां कोई ग़लती करें, तो पेरेंट्स को हमेशा उसके साथ होना ज़रूरी है, ताकि उसे हिम्मत मिले. लेकिन जब ऐसा नहीं होता है. आप उसकी ग़लती को संभालने के लिए उसके साथ नहीं होते हैं, उसे भरोसा दिलाने के लिए नहीं होते हैं कि कोई नहीं, जो हुआ सब ठीक हो जाएगा. तो उस वक़्त उसका ख़ुद पर से विश्वास उठने लगता है सिर्फ़ इसलिए क्योंकि आप उसके साथ नहीं हैं.

3. अपनी ख़ुशियों की कम परवाह होती है

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कुछ पेरेंट्स अपनी बेटियों को समझाते हैं, कि उन्हें अपने सपने और अपनी ख़ुशियों को जीना ज़रूरी है. लेकिन कुछ पेरेंट्स प्यार भी ज़रूरत पर करते हैं. जब ऐसा लड़कियों के साथ होता है. बचपन से ही उनकी ख़ुशियों को दूसरों के बाद रखा जाता है, तो कहीं न कहीं ये बात उनके दिल में घर कर जाती है कि दूसरों की ख़ुशियां ज़्यादा ज़रूरी है.

4. असफ़लता से प्रभावित होते हैं

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पेरेंट्स को अपने बच्चों को ये सिखाना चाहिए कि असफ़लता से डरना नहीं चाहिए, और उनकी ज़िम्मेदारी तब ज़्यादा हो जाती है जब वो एक लड़की हो. लड़कियों के दिमाग़ में असफ़लता का बुरा असर पड़ता है. इसलिए उन्हें समय-समय पर ये बताते रहना चाहिए कि असफ़ल होना कोई बुरी बात नहीं है, मेहनत करो सफ़लता के लिए. मगर कुछ पेरेंट्स ऐसा नहीं करते और असफ़लता के लिए डांटने और मारने लगते हैं. इसके चलते उनमें एक डर आ जाता है. और वो परीक्षा के साथ-साथ रिश्तों में भी फ़ेल होने से डरने लगती हैं.

5. ख़ुद को दूसरों से कम समझते हैं

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अगर आपकी बेटी कुछ भी अच्छा करे उसे Compliment देते रहना चाहिए. इससे उसका Confidence बढ़ता है. मगर कुछ पेरेंट्स अपनी बच्चियों के साथ ऐसा नहीं करते. उन्हें अच्छा करने पर तारीफ़ नहीं मिलती उन्हें सिर्फ़ उनकी ग़लती गिनाई जाती हैं, जब पेरेंट्स ऐसा करते हैं, तो इससे बेटियों का आत्मविश्वास हिलने लगता है. और उसे ख़ुद को छोड़कर सारी दुनिया अच्छी लगती है.

ये भेदभाव और बातें हमेशा के लिए लड़की के दिल और दिमाग़ में घर कर जाती हैं. जिस कारण से उसको कई तरह की परेशानियों से गुज़रना पड़ता है. जैसे:

1. डिप्रेशन में जाने के चांसेस बढ़ जाते हैं.

2. खाने-पीने का मन नहीं करता है.
3. Sexual एक्टिविटीज़ की तरफ़ ज़्यादा ध्यान जाता है.
4. अपने दर्द से भागने के लिए नशे का सहारा लेने लग जाती हैं.

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अपनी बेटी के दर्द को आप इन तरीकों से कम कर सकते हैं

1. अपनी कहानी को लिखकर उसे समझाएं कि आप इतने कठोर क्यों हुए? इस बात को ज़्यादा इमोशनल होकर नहीं, बल्कि एक नॉर्मल तरीके से अपनी बेटी को समझाने की कोशिश करें.

2. अपनी बेटी को उसकी बचपन की तस्वीरें दिखाएं. उन तस्वीरों के ज़रिए उन पलों को एक-दूसरे से साझा करें, जो आपने साथ बिताए थे. ये एक तरीका हो सकता है उससे दोबारा जुड़ने का और सबकुछ भुलाने का.
3. अपने वर्तमान के रिश्ते का मूल्यांकन करें. अगर कोई ऐसा रिश्ता है जो आपको अपने पेरेंट्स से दूर कर रहा है या उन्हें समझने का मौका नहीं दे रहा, तो उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल दीजिए.

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4. आपके साथ जो भी हुआ उसे सच्चे दिल से भुलाकर. अपने पेरेंट्स के साथ नए रिश्ते की नींव रखिए. एक ऐसा रिश्ता जिसमें हर एहसास को दिल खोलकर रखा जा सके.

5. आखिरी में बस इतना ही कि जो भी आपके बचपन में हुआ उसे आपने पूरी हिम्मत के साथ सहा है और उस स्थिति से को सहने के बाद भी ज़िंदा हैं. इसलिए ख़ुद को ज़िंदा रखने से ज़्यादा जीना ज़रूरी है. इसलिए ज़िंदगी को खुलकर जियें.

अगर आपके साथ ऐसा कभी हुआ है, तो उसे भुलाकर एक नई ज़िंदगी का Welcome करें. इस तरह के आर्टिकल और पढ़ने के लिए क्लिक करें.