दुनिया में अक़सर कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं जिनके बारे में जानकर मन में आत्मविश्वास और प्रेरणा घर बना लेते हैं.


कहानियों के समंदर Humans of Bombay ने साझा की है एक ऐसी महिला टैक्सी-ड्राइवर की कहानी जिसे आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे.

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“I grew up watching my mom work & take care of the house after my dad passed away. Seeing her, I resolved to be independent too. I worked before getting married & continued after. But it was difficult to manage full-time work with my kids & home, so I took up odd jobs. Then, I read in the paper that women could have taxi permits too. The opportunity was too good! So I passed the driving test & bought a taxi with my own money. My husband was very supportive & said, ‘This taxi is under your name, you need to learn how to drive it!’ Within a few months, I joined the fleet. I remember my first trip from Lower Parel to Worli, with 2 ladies. I was nervous they’d judge my driving; instead they were shocked! They’d never seen a female taxi driver–one of them got me chocolate after the ride! Soon things got harder. Some men in the union tried to ensure I got no passengers. They’d stop their taxis in front of mine & question my skills. 15 days in, I was struggling to make a U-turn around a pothole; so one of them loudly asked, ‘If you can’t get the basics right, how will you ever drive?’ It shattered my confidence & I cried for hours! But another driver encouraged me to prove them wrong & not let their words stop me! That’s what kept me going–no matter how bad things got, there were always those who supported me; whether it was family, other drivers or even a stranger! Once, an elderly man got into my taxi & said, ‘In my village I’d heard that women are making progress in cities; but this is the first time I’ve witnessed it. Seeing you drive makes me proud!’ At the end of the trip, he gave me Rs. 20! Another time, a passenger was so impressed that she interviewed me, which led to newspaper articles & an appearance on a show. Once, a policewoman wanted to take a selfie with me! Her daughter had told her about me. I was so happy! It’s been 3 years now & driving this taxi has put me in the driver’s seat of my life–allowing me to be strong & self-sufficient. It’s funny how this started over a debate. My husband & I were discussing the roles of men & women, when I told him, ‘A woman can do everything that a man can.’ We placed a bet to see who’d win–looks like I did!”

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उसके पिता की मृत्यु के बाद मां ने काम किया और घर संभाला. अपनी मां को मेहनत करते हुए देखते-देखते वो बड़ी हुई. मां को देखकर उसने अपने पैरों पर खड़े होने का निश्चय किया. शादी से पहले काम शुरू किया और शादी के बाद भी काम करना नहीं छोड़ा.

फ़ुल-टाइम काम, मेरे बच्चों और घर को मैनेज करना मुश्किल था इसलिए में कोई भी काम उठा लेती.
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एक दिन उसने अख़बार में पढ़ा कि महिलाओं को भी टैक्सी परमिट मिलती है. ये एक सुनहरा मौक़ा था. उसने ड्राइविंग टेस्ट पास किया और अपने पैसों से टैक्सी ख़रीदी.

मेरे पति ने मेरा साथ दिया और कहा, ये टैक्सी तुम्हारे नाम पर है, तुम्हें इसे चलाना सिखना ही होगा.

कुछ महीनों बाद शहर की असंख्य टैक्सियों में उसकी भी टैक्सी शामिल हो गई.

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मुझे लोअर पारेल से वर्ली तक कि अपनी पहली ट्रिप याद है, दो महिलाएं. मैं नर्वस थी कि वो मेरे ड्राइविंग को जज करेंगी पर वे चौंक गई. उन्होंने कभी महिला टैक्सी-ड्राइवर नहीं देखी थी. उनमें से एक ने ट्रिप ख़त्म होने के बाद मुझे चॉकलेट दिया.

सफ़लता के साथ-साथ समस्याएं भी बढ़ीं. यूनियन के कुछ पुरुषों ने हालात बिगाड़े और ऐसी व्यवस्था करी कि उसे पैसेंजर न मिले. उसकी टैक्सी के सामने पुरुष ड्राइवर टैक्सी रोकते और उसके ड्राइविंग स्किल पर सवाल उठाते.

15 दिन ही हुए थे और मैं एक गड्ढे के पास से यू-टर्न लेने की कोशिश कर रही थी तभी उनमें से एक ने चिल्ला कर पूछा, अगर तुम बेसिक ही ठीक से नहीं कर पा रही तो गाड़ी कैसे चलाओगी?
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इस उलाहने ने उसका आत्मविश्वास हिला दिया और वो घंटों रोईं. कहते हैं न दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं, दूसरे ड्राइवर ने उसका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन लोगों को ग़लत साबित करने को कहा. चाहे वो परिवार हो, कोई अनजान हो उसे हर क़दम पर समर्थन करने वाले लोग भी मिले और इसी से उसे कभी न रुकने की प्रेरणा मिली.

एक बार एक वृद्ध मेरी टैक्सी में बैठा और उसने कहा, मैंने अपने गांव में सुना था कि महिलाएं उन्नति कर रही हैं लेकिन आज मैंने पहली बार वो सामने से देखा. तुम्हें गाड़ी चलाते देखते हुए मुझे गर्व हो रहा है. ट्रिप ख़त्म होने के बाद उन्होंने मुझे 20 रुपये दिए!
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एक पैसेंजर उससे इतनी प्रभावित हो गई कि उसका इंटरव्यू लिया, जिससे उसे अख़बार में जगह मिली और वो एक शो में भी आईं.

एक बार एक महिला पुलिस मेरे साथ सेल्फ़ी लेने आई. उसकी बेटी ने उसे मेरे बारे में बताया था. मुझे बहुत ज़्यादा ख़ुशी हुई.

उसे टैक्सी चलाते-चलाते 3 साल हो गए और टैक्सी ने ही उसे उसकी ज़िन्दगी की ड्राइवर सीट पर बैठाया, उसे दृढ़ और आत्मनिर्भर बनाया.

इस सबकी शुरुआत का मज़ेदार क़िस्सा बताते हुए उसने कहा,

ये सब एक डिबेट से शुरू हुआ. मैं और मेरे पति पुरुषों और महिलाओं के रोल्स पर चर्चा कर रहे थे. मैंने उनसे कहा कि एक महिला वो सब कर सकती है जो पुरुष करते हैं. हमारे बीच शर्त लगी और जीत मेरी ही हुई.

ये कहानी कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में बताइए.