‘दीपावली’ यानि ‘दीपों का पर्व’. हम दिवाली क्यों मनाते हैं, इसके पीछे की कहानी हिंदुस्तान का बच्चा-बच्चा जानता है. इस दिन भगवान राम 14 साल का वनवास पूरा करके अपनी नगरी अयोध्या वापस लौटे थे. बस भगवान राम के सुरक्षित वापस लौटने की ख़ुशी आयोध्या वालों ने घर के बाहर दीपक जलाकर ज़ाहिर की. भगवान राम के आगमन पर आयोध्या नगरी दीयों से जगमगा रही थी. ये सिलसिला तब से अब तक ऐसा ही चला आ रहा है. हर साल दिवाली के मौक़े पर लोग अपने घरों में दीये जलाकर इस पर्व को ख़ुशी और उल्लास के साथ सेलिब्रेट करते हैं. 

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पर यहां दिवाली से जुड़ा एक सवाल है, जिसे जानने की बार-बार मन में ख़्वाहिश जागती है. वो ये है कि अगर दिवाली भगवान राम का पर्व है, तो फिर हम इस दिन गणेश-लक्ष्मी की पूजा क्यों करते हैं? अगर आपके दिल में भी बार-बार यही प्रश्न उठता है, तो अब इसका जवाब मिल गया. 

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दिवाली पर क्यों की जाती है गणेश-लक्ष्मी की पूजा?

कहा जाता है कि देवाताओं और राक्षसों के बीच हज़ारों साल तक समुद्र मंथन चला था. इस दौरान एक दिन मंथन में से महालक्ष्मी का जन्म हुआ. लक्ष्मीजी के जन्म के साथ ही देवता पहले से ज़्यादा शक्तिशाली हो गये थे. लक्ष्मीजी का जन्म कृष्णपक्ष की आमवस्या को हुआ था. मंथन से निकलती लक्ष्मीजी को देख सभी देवता हाथ जोड़ कर उनकी आराधना करने लगे. 

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इसलिये कार्तिक आमावस्या के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. लक्ष्मीजी की आराधना में किसी भी तरह की कोई ग़लती न हो, इसलिये उनके साथ गणेशजी और सरस्वती जी की पूजा भी की जाती है. ताकि घर में लक्ष्मीजी के साथ-साथ लोगों को विद्या और बुद्धि भी मिले. 

हमारी पूरी टीम की तरफ़ से दिवाली की शुभकामनाएं.

हैप्पी एंड सेफ़ दिवाली!  

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