ऑनलाइन ट्रैवल गाइड टेस्ट ‘एटलस’ ने दुनियाभर के 150 लीजेंडरी रेस्टोरेंट की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में हरियाणा के मुरथल में स्थित अमरीक सुखदेव ढाबा को 23वां स्थान मिला है. ये ढाबा अपने लजीज़ पराठों के लिए दुनियाभर में मशहूर है. दिल्ली-एनसीआर के युवाओं के बीच ये ढाबा काफ़ी मशहूर है. दिल्ली से हरियाणा जाने वाला शायद ही कोई ऐसा हो जो मुरथल में ‘सुखदेव के ढाबे’ पर रुककर पराठे न खाये. केवल पराठे ही नहीं, बल्कि यहां की कुल्हड़ चाय भी काफ़ी मशहूर है.

दुनियाभर के 150 फ़ेमस रेस्टोरेंट्स की लिस्ट में मुरथल स्थित अमरीक सुखदेव ढाबे को 23वां स्थान मिला है. इस दौरान यहां के आलू पराठे को बेस्ट करार दिया गया है. ख़ासकर इस ढाबे की लोकप्रियता का श्रेय यहां आलू पराठा को जाता है. यहां पर मसालेदार आलू की स्टफिंग के साथ पराठा तैयार किया जाता है जो अपने देसी स्वाद के लिए जाना जाता है.

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दिल्ली-अंबाला नेशनल हाईवे पर स्थित सड़क किनारे एक छोटे से ढाबे के रूप में शुरुआत के बाद आज ‘अमरीक सुखदेव ढाबा’ वर्ल्ड फ़ेमस रेस्टोरेंट बन चुका है. लेकिन इस मुक़ाम तक पहुंचने के लिए इस ढाबे ने बेहद मुश्किल सफ़र तय किया है. आज ये केवल नाम का ढाबा है, असल में ये एक 3 स्टार होटल है.

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58 साल पहले चाय से की थी शुरुआत

सरदार प्रकाश सिंह ने सन 1956 में एक छोटी सी चाय की दुकान के साथ इसकी शुरुआत की थी. सड़क किनारे टिन की इसी दुकान पर एक ज़माने में दिल्ली-हरियाणा के ट्रक ड्राइवर चाय और मट्ठे का नाश्ता किया करते थे. इसके बाद यहां पर चाय और मट्ठे के साथ दाल-रोटी-चावल और सब्जी खटिया पर परोसी जाने लगी. धीरे-धीरे ढाबा मशहूर होते गया और मेन्यू भी बदलता गया. फिर यहां पर छोटे भटूरे के साथ डोसा और कई किस्म के पराठे दिए जाने लगे, जो आज भी मशहूर हैं.

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सुखदेव के पराठों हैं मशहूर

साल 2000 के बाद से ‘अमरीक सुखदेव ढाबा’ के पराठे काफ़ी मशहूर हैं. इन्हें सफ़ेद मक्खन, दही और अचार के साथ परोसा जाता है. इसके अलावा यहां कुल्हड़ वाली चाय भी काफ़ी मशहूर है. यहां की चाय के ऊपर केसर के रेशे भी डाले जाते हैं. पिछले कई दशकों से अपने ग्राहकों की पसंद हिसाब से इंडियन, चायनीज़, कॉन्टिनेंटल परोस रहा है. आज ये ‘ढाबा’ जीटी रोड पर एक प्रमुख डेस्टिनेशन है.

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पूरी तरह से शाकाहारी ढाबा

दिल्ली-एनसीआर के लोगों के बीच आज मुरथल के ढाबों की ख़ास अहमियत है. ये लोगों के वीकेंड का बेस्ट डेस्टिनेशन माना जाता है. अमरीक सुखदेव पर सभी प्रकार के व्यंजन मिलते हैं, लेकिन नॉनवेज नहीं मिलता. इस ढाबे की यही ख़ासियत है. बताया जाता है कि एक महान संत बाबा कलीनाथ के आशीर्वाद की छाया में यह ढाबा तरक्की कर रहा है. इसीलिए यहां पर मांशाहारी भोजन नहीं परोसी जाती हैं.

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आज इस ढाबे की देखभाल उनके बेटे अमरीक सिंह और सुखदेव सिंह कर रहे हैं. इन्हीं के नाम पर ढाबे का नाम ‘अमरीक सुखदेव ढाबा’ है.

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