रोने को अक्सर कमज़ोरी की निशानी समझा जाता है. यही वजह है कि आदमी अक्सर ख़ुद को आंसुओं से दूर दिखाने की कोशिश करते हैं. कोई रो भी दिया, तो लोग ताना दे देते हैं. क्या लड़कियों की तरह रोता है ये… जबकि सच ये है कि लड़का हो या लड़की, भावनाएं सभी में होती हैं. और रोना कमज़ोरी तो कतई नहीं है, बल्कि रोने के फ़ायदे हैं. 

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जी हां, रोने के हेल्थ और मूड के हिसाब से बहुत फ़ायदे हैं. वो क्या हैं आइए जानते हैं-

इंसान रोता क्यों है?

ये एक दिलचस्प सवाल है कि आख़िर इंसान रोते क्यों है. इसके वैज्ञानिक अलग-अलग जवाब देते हैं. कोई एक जवाब नहीं है. फिर भी अगर एक शब्द में कहें तो भावुकता. जब भी इंसान किसी चीज़ के चलते भावुक हो जाता है, तो उसकी आंख से आंसू निकल पड़ते हैं. अब इंसान भावुक दुख में भी हो सकता है और ख़ुशी के मौक़ों पर भी. 

कुछ वैज्ञानिक टेस्टोस्टेरोन नाम के हारमोन का भी हमारे रोने से गहरा ताल्लुक़ मानते हैं. जिन लोगों में टेस्टोस्टेरोन कम बनता है, वो ज़्यादा रोते हैं. साथ ही, महिलाएं, पुरुषों से ज़्यादा रोती हैं. महिलाएं एक महीने में औसतन करीब 3.5 बार रोती हैं, जबकि पुरुष 1.9 बार. इसके पीछे वजह उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं.

बता दें, आंखों से आंसू निकलने की वजह लैक्रीमल ग्लैंड है. हमारी दोनों आंखों के किनारे पर एक छोटी सी द्रव की थैली होती है, जिसे लैक्रीमल ग्लैंड कहते हैं. आंसू यहां से आते हैं. आपने गौर किया होगा कि कभी-कभी रोते वक़्त नाक से पानी निकलने लगता है. वो इसी लैक्रीमल ग्लैंड के चलते होता है. दरअसल, जब हम ज़्यादा रोने लगते हैं, तो ग्लैंड पानी के दबाव को बांट देता है, जिसके चलते कुछ आंसू आंख से तो कुछ नाक की ओर से बहते हैं. 

आंसू का हमारी सेहत पर पड़ता है पॉज़िटिव असर (रोने के फ़ायदे)

जी हां, रोना आपके हेल्थ के लिए अच्छा है. ख़ासतौर से आपकी आंखों के लिए. दरअसल, वैज्ञानिकों ने आंसुओं के तीन प्रकार बताए हैं. पहला बेसल, जो इंसान की आंखें झपकने पर निकलते हैं. ये आंखों में नमी बनाए रखने का काम करते हैं. दूसरे, रिफ़्लेक्स कहलाते हैं, जो आंखों के हवा, धुएं, मिट्टी आदि के संपर्क में आने के कारण आते हैं. शरीर इन आंसुओं के द्वारा आंखों की सुरक्षा करता है. वहीं, तीसरे इमोशनल आंसू हैं, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर आते हैं.

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ये द्रव आंख की सुरक्षा और आंख की अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी है. अगर आंख सूख जाएगी तो कई तरह की आंख संबंधी बीमारियां हो जाएंगी. रोने से आपकी भावनाएं नियंत्रित होती हैं और मानसिक तनाव में कमी आती है. क्योंकि, शरीर में तनाव के कारण जो टॉक्सिन जमा हो जाते हैं, वो रोने से आंसुओं के ज़रिए रिलीज़ हो जाते हैं. 

साथ ही, आंसुओं में Iysozyme नामक फ्लूइड होता है, जिस कारण रोने से आंखों के लिए हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं और आंखें साफ़ होती हैं. रोने का उद्देश्य टाक्सिक तत्वों को बाहर निकालना भी होता है. रोने से आक्सीटोन और इंडोजेनियस ओपॉएड्स रिलीज़ होते हैं, जो आपको शारीरिक और भावनात्क दर्द से राहत प्रदान करते हैं. इसलिए इन्हें फ़ीलगुड केमिकल कहा जाता है.

हालांकि, अगर कोई इंसान बहुत ज़्यादा रोता है, तो उसे डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए. क्योंकि कई बार डिप्रेशन या आंख में कोई परेशानी की वजह से भी आंसू निकलते हैं. ऐसे में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए. मोटे तौर पर अगर नॉर्मली आंसू आते हैं, तो ये अच्छी बात है. क्योंकि, रोने के फ़ायदे बहुत हैं और इससे आप हलका भी महसूस करते हैं.