आज रिबॉन्डिंग, स्मूद्निंग, स्ट्रेटनिंग आदि प्रक्रियाओं से बालों को सीधा करना बहुत चलन में है. इन सभी प्रक्रियाओं में बालों को केमिकलों की मदद से सीधा और स्मूद बनाया जाता है. सीधे बालों को मैनेज करना भी आसान होता है. ये एक तरह से स्थायी स्ट्रेटनिंग होती है, इसलिए इसे कराने से पहले आपको इसके फ़ायदे और नुकसान जान लेने चाहिए.

1. केमिकल के द्वारा इस प्रक्रिया में बालों का स्ट्रक्चर बदल दिया जाता है. इसके लिए बहुत ही स्ट्रांग केमिकलों का प्रयोग किया जाता है. इनसे बालों के डैमेज होने का खतरा बना रहता है.

2. इस प्रक्रिया के पूरा होने में दो से तीन घंटे का समय लगता है. शुरू-शुरू में बाल चिपके हुए लगते हैं और केमिकलों के कारण उनमें गंध आती रहती है.

3. इस प्रक्रिया के तीन दिन बाद तक न तो आपको बाल धोने होते हैं और न ही आप नहा सकते हैं. तीन दिनों तक बालों का ख़ास ख़याल रखना पड़ता है.

4. इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकलों के कारण आपको आंखों में जलन, सर दर्द, थकान की शिकायत भी हो सकती है.

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5. अगर आप गर्भवती हैं, तो आपको इसे कराने का ख़याल त्याग देना चाहिए. इसमें मौजूद फॉर्मलडिहाइड के गर्भवती औरतों पर और बुरे प्रभाव हो सकते हैं.

6. घर जाने के बाद भी आपके बालों से हवा में केमिकल निकलते रहते हैं.

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7. इससे सबके बाल बिलकुल सीधे नहीं हो जाते. जिनके बाल बहुत घुंघराले होते हैं, उन्हें ऐसी आशा नहीं रखनी चाहिए. जिनके बाल बहुत पतले हैं, उन्हें भी ये कराने से बचना चाहिए, इससे बाल बेजान और कम घने लगेंगे.

8. इससे बालों का झड़ना बढ़ जाता है. अगर आपने अपने बालों को कलर कर रखा है, तब ऐसा होने की सम्भावना और ज़्यादा रहती है. कुछ लोगों के बाल जल तक जाते हैं, जिन्हें काटना पड़ जाता है. हर क्लाइंट पर अलग असर होता है, कई लोगों के बाल बार-बार ट्रीटमेंट कराने के बावजूद ठीक रहते हैं और कई के पहली ही बार में डैमेज हो जाते हैं.

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9. आपको इसकी लत भी लग सकती है. एक बार ये करा लेने के बाद आप हमेशा ऐसे बालों की चाह रखने लगते हैं. इसलिए कई लोग बार-बार ये कराते हैं.

10. अगर आप इन साइड-इफेक्ट्स से बचना चाहते हैं, तो आपको अपने बालों के प्राकृतिक टेक्श्चर को अपना लेना चाहिए. कभी कभी फ्लैट आयरन भी इस्तेमाल कर सकते हैं.