लाल-लाल और मीठे रस से भरे सेब सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होते हैं. इसलिए ये फल हर किसी को पंसद होता है. कोई बीमार होता है तो हम उसके लिए सेब लेकर जाते हैं. ऑफ़िस में या फिर बच्चों को भी लंच बॉक्स के साथ हम एक सेब ज़रूर देते हैं. पर मार्केट से सेब ख़रीदते समय आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि कौन-सा सेब सेहत के लिए ठीक है और कौन सा नहीं?

दरअसल, मार्केट में दो तरह के सेब मिलते हैं. एक बहुत ही चमकदार मतलब अट्रैक्टिव और दूसरा कम चमकदार. ऐसा क्यों और इनमें से कौन सा सेब हेल्दी होता है, इसका जवाब आज हम आपके लिए लेकर आए हैं.

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होता यूं है कि जब सेब पेड़ पर लगा होता है तो वो अपने आप को प्रोटेक्ट करने के लिए एक डस्ट जैसी कोटिंग कर लेता है. ये प्रोटेक्टिव लेयर उसे अपना मॉइस्चर और जूस को प्रोटेक्ट करने में मदद करती है. मगर जब सेब मार्केट में जाते हैं तो उन पर से ये लेयर हटाकर एक कैमिकल वैक्स की कोटिंग कर दी जाती है.

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ये उसे और भी Shiny बना देती है. इससे इसके दाम भी बढ़ जाते हैं. इसलिए ये मंहगे मिलते हैं. इनकी डिमांड भी अधिक होती है. मगर इन्हें खाने के बाद आपके शरीर के अंदर कुछ अनवांटेड केमिकल्स भी चले जाते हैं. ये आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. अब बात करते हैं दूसरे वाले की. ये जो कम चमकदार सेब होते हैं मगर इन पर ऐसी कोई कोटिंग नहीं होती. इन्हें किसान डायरेक्ट बाज़ारों में बेचते हैं.

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ये तो बात थी नॉर्मल एप्पल की. मार्केट में एक और तरह के एप्पल बिकते हैं. इन्हें Arctic Apples कहते हैं, जो अधिकतर यूएसए में या फिर वहां से एक्सपोर्ट कर अन्य देशों में बेचे जाते हैं. इन सेबों की ख़ासियत ये है कि ये कभी ख़राब नहीं होते. आम सेब जहां काट कर रख देने पर भूरा पड़ने लगता है. वहीं Arctic Apples कभी भूरे नहीं पड़ते.

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सेब के भूरा पड़ने के पीछे एक माइक्रो न्यूट्रीयेंट का हाथ है. इसका नाम है Polyphenol. इसकी वजह से सेब काटे जाने पर भूरे पड़ने लगते हैं. ये एंटीऑक्सिडेंट्स का बहुत अच्छा सोर्स होता होता है. इसे खाने से वज़न कम करने से लेकर द़िमागी बीमारियों से लड़ने में भी मदद मिलती है.

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वैज्ञानिकों ने तकनीक की सहायता से सेब के अंदर बनने वाले Polyphenol की मात्रा को कम कर दिया. इसलिए वो काटने पर जल्दी भूरे नहीं पड़ते. इनको ही Arctic Apples कहते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि इस सेब को खाने से क्या फ़ायदा? तो भईया इसका जवाब इस कहावत में छुपा है- 'जो दिखता है वो बिकता है.'

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इसलिए जहां तक हो सके ऑर्गेनिक फ़्रूट्स या वेजिटेबल्स ख़रीदने की कोशिश करें. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो डायरेक्ट किसान या सब्ज़ी मंडी वाली आढ़त से इन्हें ख़रीदने की कोशिश करें. सेब से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप ये वीडियो ज़रूर देखें:

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