Freedom Fighter Railway Station: आज के समय में ट्रेन (Train) से रोज़ाना लाखों लोग सफ़र करते हैं. ये मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सबसे सस्ता और किफ़ायती ट्रांसपोर्ट है. भारत में रेल कनेक्टिविटी का जाल काफ़ी बड़े पैमाने पर फ़ैला हुआ है. जगह-जगह पर रेलवे स्टेशन बने हुए हैं, ताकि हर जगह के लोगों को रेल यात्रा की सुविधा मिल सके. ज़्यादातर रेलवे स्टेशन के नाम भी उस जगह के नाम पर दिया जाता है, ताकि यात्रियों के दिमाग़ में कोई कंफ्यूजन ना पैदा हो सके. लेकिन कई रेलवे स्टेशन ऐसे भी हैं, जिनके नाम क्रांतिकारियों या स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखे गए हैं. ये उन सेनानियों को ट्रिब्यूट देने के लिए बने हैं, जिन्होंने देश की आज़ादी में अभूतपूर्व योगदान दिया. 

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आइए आपको उन रेलवे स्टेशन के नाम बता देते हैं, जिनके नाम स्वतंत्रता सेनानियों पर रखे गए हैं.

1. पंडित राम प्रसाद बिस्मिल रेलवे स्टेशन (शाहजहांपुर)

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले में स्थित पंडित ‘राम प्रसाद बिस्मिल स्टेशन’ एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है. इस स्टेशन का नाम प्रमुख स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर रखा गया है. इस स्टेशन में दो प्लेटफॉर्म हैं. इसके साथ ही वो काकोरी कांड जैसी प्रमुख घटनाओं में भी शामिल थे. लेकिन 30 साल की उम्र में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी. 

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2. बेलानगर रेलवे स्टेशन (कोलकाता)

कोलकाता में में स्थित इस रेलवे स्टेशन का नाम बेला बोस के नाम पर रखा गया है. इसीलिए इसे ‘बेलानगर रेलवे स्टेशन’ के नाम से पुकारते हैं. बेला बोस क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस की भतीजी थीं. उन्होंने 1936 में इंडियन नेशनल आर्मी के ख़ुफ़िया प्रमुख हरिदास मित्रा से शादी की. इसके साथ ही उन्हें INA टीम के सदस्यों की सुरक्षा का देखभाल करने का ज़िम्मा सौंपा गया था. उन्होंने जुलाई 1952 में अपनी अंतिम सांस ली थी. 

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3. सुनाम उधम सिंह वाला स्टेशन (संगरूर)

ये रेलवे स्टेशन पंजाब के संगरूर में स्थित है. इस स्टेशन को पहले लोग सुनाम के नाम से जानते थे, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर ‘सुनाम उधम सिंह वाला स्टेशन‘ रख दिया गया. उधम सिंह 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार के साक्षी थे. इस नरसंहार को देखने के बाद उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में कूदने और Reginald Dyer और Michael O’Dwyer से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली थी. उन्होंने इसका बदला लेते हुए Michael O’Dwyer को 6 गोलियां दागी थी. 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में Michael O’Dwyer की हत्या का दोषी करार देते हुए फांसी दे दी गई. 


4. वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन (झांसी)

ख़ूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी‘, देश की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के लिए कहे गए ये शब्द आज का बच्चा-बच्चा जानता है. उन्होंने झांसी की रक्षा के लिए अंग्रेज़ साम्राज्य से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुईं. उन्ही को ट्रिब्यूट देते हुए ‘झांसी रेलवे स्टेशन’ का नाम बदलकर ‘वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन‘ रख दिया गया. 

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5. महादेवप्पा मेलारा रेलवे स्टेशन

कर्नाटक के हावेरी ज़िले में बसे ‘हावेरी रेलवे स्टेशन’ का नाम साल 2020 में बदलकर महादेवप्पा मेलारा रेलवे स्टेशन रख दिया गया था. मेलारा महादेवप्पा स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे. वे 18 वर्ष की आयु में ‘दांडी मार्च’ में महात्मा गांधी के साथ गए.  उनके त्याग और साहस ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रेरित किया. उन्होंने समाज सेवा और देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन अर्पित किया था. उन्होंने औपनिवेशिक शासन का विरोध करने के लिए 74 विभिन्न आंदोलनों का आयोजन किया था.

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6. नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन (झारखंड)

आज़ादी के लिए सशस्त्र संघर्ष छेड़ने के अपने इरादे को अंजाम तक पहुंचाने और ‘आज़ाद हिंद फौज’ को कायम करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब देश छोड़ा था, तो उन्होंने आख़िरी घंटे झारखंड के गोमो में गुजारे थे. गोमो स्टेशन से ही वो कालका मेल पकड़कर पेशावर के लिए रवाना हुए थे. अब गोमो जंक्शन को नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन के नाम से जाना जाता है.

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7. वांचि मनियाची रेलवे स्टेशन (मनियाची)

वंचिनाथन एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने आज़ादी के ख़ातिर ट्रेन में रेलवे कलेक्टर को गोली मार दी थी. वंचिनाथन के बलिदान को याद करने के लिए, पूर्व लोकसभा सांसद कुमारी अनंतन ने ‘मनियाची रेलवे जंक्शन’ का नाम बदलकर ‘वांचि मनियाची’ कर दिया. 

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ये रेलवे जंक्शन स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाते हैं.