पिज़्ज़ा (Pizza) दुनिया में सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले फ़ास्ट फ़ूड्स में से एक है. भारत में भी बहुत से लोग इसे खाना पसंद करते हैं. पिज़्ज़ा एक तरह से लग्ज़रीयस लाइफ़स्टाइल की पहचान बन गया है. क्योंकि ज़्यादातर पैसे वाले लोग ही इसे खाते हैं. मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि पिज़्ज़ा कभी ग़रीब-मज़दूरों के पेट भरने के लिए बना था.

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ऐसे में ग़रीबों के लिए बना Pizza कैसे अमीरों का फ़ेवरेट फ़ूड बन गया, इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है. 

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नेपल्स के इतिहास में Pizza की शुरुआत

Pizza की शुरुआत 18वीं शताब्‍दी में इटली के नेपल्‍स शहर से हुई. उस वक़्त नेपल्स यूरोप से सबसे समृद्ध शहरों में से एक था. आर्थिक गतिविधियों के कारण यहां दूसरे शहरों और ग्रामीण इलाकोंं से लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में आने लगे. इसमें किसान, व्यापारी, मज़दूर सभी थे. इसकी आबादी 1700 में 200,000 से बढ़कर 1748 में 399,000 हो गई.

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ऐसे में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी शहरों में आ गया, जिसके पास बहुत पैसा नहीं था. वो लगातार काम की तलाश में रहते थे. जिसके चलते उन्हें ऐसा खाना चाहिए था, जो सस्ता भी हो और उनका पेट भी भर सके. पिज़्ज़ा ने इस ज़रूरत को पूरा किया. उस दौरान दुकानों के बजाय रेहड़ी-पटरी पर इसे बेचा जाता था. इसे बड़ी सपाट ब्रेड पर सस्‍ती सब्जियां और मीट के टुकड़ों को रखकर लोगों का दिया जाता था. 

धीरे-धीरे स्वाद में हुआ इज़ाफ़ा

सस्ता होने के चलते बहुत से लोग पिज़्ज़ा खाते थे. हालांकि, उस वक़्त इसका स्वाद बहुत अच्छा नहीं था. ऐसे में इसमें सुधार किया जाने लगा. धीरे-धीरे इनमें नमक, लहसुन, सूअर का मांस, टमाटर, मछली और काली मिर्च का इस्‍तेमाल बढ़ गया. इससे पिज़्ज़ा सस्ते के साथ टेस्टी भी हो गया और आम लोगों के बीच इसकी पॉपुलैरिटी बढ़ने लगी.

19वीं सदी के आख़िर में बना आधुनिक पिज़्ज़ा

पिज्जा की पॉपुलैरिटी इतनी बढ़ चुकी थी कि अब अमीर वर्ग की नज़र भी इस फ़ूड की तरफ़ जाने लगी. इस दौरान साल 1889 में किंग Umberto I और क्वीन Margherita नेपल्स आए थे. वो यहां फ़्रेंच फ़ूड खाकर काफ़ी बोर हो चुके थे. ऐसे में उन्होंने कुछ लोकल फ़ेमस फ़ूड की फ़रमाइश की.

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Raffaele Esposito ने उनके लिए तीन तरह के पिज़्ज़ा बनाए. उनमें से क्वीन को मोज़ेरेला चीज़ से बनाया गया Pizza बेहद पसंद आया. क्वीन Margherita के सम्मान में ही उस पिज़्ज़ा का नाम Margherita रख दिया गया. ये पिज्जा आज भी लोगों को काफ़ी पसंंद आता है.

जब नेपल्स से निकलकर अमेरिका पहुंचा Pizza

19वीं सदी में लोग काम की तलाश में एक देश से दूसरे देश ज़्यादा आने-जाने लगे थे. नेपल्स में भी लोग बाहर निकले. हालांकि, सिर्फ़ लोग ही बाहर नहीं गए, बल्कि वो अपने साथ लोकल फ़ूड को भी बाहर ले आए. उसमें पिज़्ज़ा भी शामिल था. 

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पिज़्ज़ा को नेपल्स के बाद अपना दूसरा घर अमेरिका में मिला. 19वीं शताब्दी के अंत तक, इटैलियन प्रवासी पूर्वी तट पर पहुंच चुके थे. साल 1905 में न्‍यूयॉर्क सिटी में पहला पिज़्ज़ा रेस्‍टोरेंट 'Lombardi' शुरू हुआ. अब पिज़्ज़ा रेहड़ी-पटरी से उठकर रेस्टोरेंट में पहुंच चुका था. उसके टेस्ट और क्वालिटी में भी सुधार हो गया.

देखते ही देखते पिज़्ज़ा पूरे अमेरिका में पॉपुलर हो गया. साथ ही, दाम भी बढ़ गए. लोग भी पिज्जा के लिए ऊंची क़ीमते अदा करने लगे. इस तरह जो पिज़्ज़ा कभी ग़रीबों का पेट भरने के लिए बना था, वो उनसे दूर होकर अमीरों का फ़ेवरेट फ़ूड बन गया.  

80 के दशक में भारत में हुई एंट्री

भारत में पिज्जा 1980 के दशक में आया. हालांकि,1996 तक कुछ अमेरिकी फ़ास्ट फ़ूड चेन अपनी तरह का पिज़्ज़ा बेच रहे थे. ज़्यादातर भारतीयों के लिए पिज़्ज़ा का मतलब ब्रेड बेस के ऊपर प्रोसेस्ड चीज़ और टोमैटो कैचअप ही था. थोड़ा पॉपुलर हुआ, तो लोकली भी थोड़ी-बहुत दुकानें खुल गईं. 

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सही मायने में पिज़्ज़ा परोसने वाला पहला इटैलियन रेस्टोरेंट चेन्नई में साल 1998 को खुला था. इसका नाम 'Bella Ciao' था. उन्होंने अपना खुद का पिज़्ज़ा ओवन बनाया था. उस समय अधिकांश ओवन सीधे इटली से आयात किए जाते थे, वहीं, पुड्डेचेरी में कुछ इटैलियंस ने आग की ईंटों, मिट्टी और कंक्रीट का उपयोग करके स्वदेशी लकड़ी से बने पिज़्ज़ा ओवन का निर्माण शुरू कर दिया था. 2000 के दशक की शुरुआत में Domino’s और Pizza Hut की बहुत सी फ़्रैंचाइजी खुल गईं. आज तो पूरे भारत में ही पिज़्ज़ा बनाने और उसे खाने वालों की कोई कमी नहीं है.