मेंटल हेल्थ यानि कि मानसिक स्वास्थ्य. ये विषय जितना महत्वपूर्ण है, इसकी उतनी अवहेलना भी हुई है. इस पीड़ा से गुज़र रहे लोगों को समाज आज भी बड़ी बेशर्मी के साथ पागल करार दे देता है. ऐसे में पीड़ित शख़्स ख़ुद की तकलीफ़ों को बयां तक नहीं कर पाते. यहां तक कि परिवार के अंदर भी लोग इस बारे में बात करने से डरते हैं.   

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हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बातचीत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और इस सकारात्मक बदलाव को देखना अच्छा है. उदाहरण के लिए, एक कंपनी ने हाल ही में दोपहर 12 बजे और 1 बजे के बीच मीटिंग्स पर रोक लगा दी, क्योंकि दोपहर का भोजन एक कर्मचारी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन आप में से जो लोग ब्रेकअप या तलाक़ से गुज़र रहे हैं, और इसके चलते परेशान हैं, उन्हें ये ज़रूर पढ़ना चाहिए.  

उमर बाज़ा जो कि एक चिकित्सक नज़र आते हैं, उन्होंने ट्विटर पर एक महत्वपूर्ण थ्रेड शेयर किया कि कैसे ब्रेकअप हमारे मेंटल हेल्थ पर निगेटिव इम्पैक्ट डाल सकता है.  

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उन्होंने लिखा कि क़रीब 10 से ज़्यादा लोगों ने उन्हें इस बारे में लिखने के लिए रिक्वेस्ट की, लेकिन ये थोड़ा जटिल है क्योंकि अलग-अलग परिणाम हो सकते हैं. ये ब्रेकअप का हमारी मेंटल हेल्थ पर इम्पैक्ट है. जब ब्रेकअप होता है तो बेहद दर्द और डिप्रेशन की उम्मीद की जाती है.   

उमर ने इस ट्विटर थ्रेड में बताया कि ब्रेकअप इसलिए ज़्यादा दर्द पहुंचाता है क्योंकि हम उस शख़्स को जीते जी खो बैठते हैं. एक ऐसा शख़्स जिसके साथ हमने बहुत कुछ अपना शेयर किया होता है और अचानक वो हमसे अलग हो जाता है. ऐसे में इस सदमे से उभरने में एक लंबा अरसा लग सकता है. साथ ही ये कई चरणों में होता है. कुछ लोग जल्दी उभर जाते हैं तो कुछ को वक़्त लगता है. हालांकि, कुछ मामलों में, ये एक पूर्ण विकसित मानसिक बीमारी में बदल सकता है.  

उन्होंने बताया कि इसके कई कारण हो सकते हैं. हालांकि, ज़्यादातर मामलों में केवल एक चीज जो मदद करेगी वो है समय. दुख की तरह समय महत्वपूर्ण है. हमें खुद को दुखी होने का समय देने की ज़रूरत है और उस दर्द को महसूस करना है जो पोस्ट ब्रेकअप होता है.  

हालांकि, समय कितना लगेगा ये तय नहीं है. एक हफ़्ता भी लग सकता है, महीना भी लेकिन ये तय नहीं है. इसकी वजह ये है कि हमने एक ऐसे शख़्स को खोया है, जिससे हम भावनात्मक रूप से जुड़े थे. उनके साथ काफ़ी समय गुज़ारा है और एक पल में सब ख़त्म हो जाता है. ऐसे में हमें ख़ुद पर ध्यान देने की ज़रूरत होती है. हम शॉर्टकर्ट नहीं ले सकते.   

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ये 1 साल या 18 महीने से अधिक समय तक रहता है, तो हमें निश्चित तौर पर कुछ प्रकार के ट्रीटमेंट की ज़रूरत होती है. क्योंकि ये एक ट्रॉमा या डिप्रेशन की स्थिति हो सकती है. साथ ही उन्होंने कहा कि अपने इमोशन्स को दबाइए मत. अगर हम दर्द को महसूस करने के बजाय बस आगे बढ़ने की सोचेंगे तो ये बाद में मानसिक समस्या के रूप में हमारे सामने आ सकता है.   

उमर ने कहा कि उऩ्हें उम्मीद है कि इस थ्रेड ने ब्रेकअप के बाद क्या होता है, उसे कुछ हद तक स्पष्ट किया है. लेकिन एक बार फिर, ये अन्य कारकों के आधार पर जटिल हो सकता है और हमें इसे ध्यान में रखना होगा.  

इसे अलावा उमर ने कुछ यूज़र्स के सवालों के जवाब भी दिए.   

एक बात को ध्यान रखिए. लोगों से ज़्यादा ये ज़रूरी है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं. लोगो की फ़िक्र करना छोड़ दीजिए. परेशानी है तो बात कीजिए. ज़्यादा समस्या है तो डॉक्टर्स से सलाह लीजिए. इसमें कुछ भी ख़राब नहीं है. याद रखिए, दिमाग़ भी शरीर का ही हिस्सा है, उसे भी कुछ परेशानी हो सकती है. ख़ुश रहिए, कोशिश तो कीजिए. सब ठीक हो जाता है.