Interesting Facts About Sprite Bottle: हम सभी ने स्प्राइट हरी बोतल में पी है, इसके अलावा Due भी हरी बोतल में ही आती है, लेकिन अमेरिकी Coca-Cola Company ने अपनी Sprite की हरी बोतल का रंग बदलने का फ़ैसला लिया है. अब जो बोतल मार्केट में मिलेगी वो ट्रांसपेरेंट होगी. मार्केट में पहली बार हरे रंग की बोतल 1961 में आई थी. इतने लंबे समय के बाद इस बोतल के रंग में बदलाव किया जा रहा है. ये बदलाव इसके मार्केट वैल्यू पर असर डालेगा या नहीं, ये तो बाद में पता चलेगा, लेकिन आपको बताते हैं कि आख़िर कंपनी ने ये फ़ैसला क्यों लिया है?

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बोतल के रंग में बदलाव का कारण प्रदूषण से देश को बचाना है क्योंकि अमेरिका, कनाडा और भारत जैसे देशों में प्लास्टिक प्रदूषण दिन पर दिन बढ़ रहा है. इसे रोकने के लिए जापान और दक्षिण कोरिया ने दो दशक से रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देते हुए प्लास्टिक कचरे को कम करना सउरू कर दिया, जिसके चलते इन देशों में कलरफ़ुल प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 अगस्त से विदेशों के मार्केट में Sprite की हरें रंग वाली बोतलें बिकना बंद हो जाएंगी. इसके अलावा, कंपनी की बाकी ड्रिंक भी ट्रांसपेरेंट बोतल में ही बेची जाएंगी. कंपनी ने रंग बदलने का क़दम पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिहाज़ से उठाया है.

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बोतल का रंग बदलने के पीछे एक बड़ी वजह है ये भी है कि हरा रंग पर्यावरण को ज़्यादा नुकसान पहुंचाता है क्योंकि दूसरी ट्रांसपेरेंट बोतले नहीं बनाई जा सकतीं. इसके चलते, हरे रंग की बोतलों का कचरा बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है. बोतल ट्रांसपेरेंट होगी तो उसे रिसायकल करना और दूसरी बोतल बनाना आसान होगा और कचरा भी कम होगा.

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ट्रांसपेरेंट बोतल में स्प्राइट बेचने की शुरुआत नॉर्थ अमेरिका से की जाएगी. इसके बाद ही दुनिया के दूसरे देशों में हरे रंग की बोतल में स्प्राइट बेची जाएगी. हालांकि, ये रंग स्प्राइट की पहचान बन चुका है. स्प्राइट दुनिया की तीसरी सबसे ज़्यादा पी जाने वाली ड्रिंक है और कोका कोला कंपनी की दूसरी सबसे ज़्यादा बिकने वाली ड्रिंक है.

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आपको बता दें, कंपनी ने क़दम अपनी पहल ‘वर्ल्ड विदआउट वेस्ट’ को ध्यान में रखकर उठाया है, जिसकी शुरुआत 2018 में हुई थी. कंपनी का दावा है कि वो 2030 तक बेची जाने वाली हर बोतल और कैन को इकट्ठा कर रिसायकल करेगी.