मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में स्थित मावलिननॉन्ग गांव एशिया का सबसे साफ़-सुथरा गांव है. मावलिननॉन्ग को साल 2003 में एशिया के सबसे साफ़ गांव के रूप में, जबकि साल 2005 में भारत के सबसे साफ़-सुथरा गांव के रूप में चुना गया. साफ़-सफ़ाई में अव्वल रहने के साथ-साथ इस गांव की साक्षरता दर भी 100 फ़ीसदी है. इस गांव के अधिकतर लोग अंग्रेजी भाषा में ही बात करते हैं. साल 2007 से ही इस गांव के सभी घरों में टॉयलेट बने हुए हुए हैं. साल 2014 की जनगणना के अनुसार इस गांव में केवल 95 परिवार रहते हैं.

youngisthan

करीब 100 साल पहले इस गांव में हैजा फ़ैल गया था. किसी भी तरह की मेडिकल सुविधा न होने की वजह से इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ़ सफ़ाई ही एकमात्र तरीका बच गया था. तब से लेकर आज तक इस गांव के लोग सफ़ाई को लेकर बेहद सजग रहते हैं. 

youngisthan

सफ़ाई के प्रति इस गांव के लोगों की जागरुकता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अगर सड़क पर चलते किसी शख़्स को कचरा नज़र आ जाये तो वो वहीं रुककर पहले कचरे को डस्टबिन में डालता है फिर आगे बढ़ता है. इस गांव के लोग घरों से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करने के बाद उसे खेती के लिए खाद के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. 

मावलिननॉन्ग की एक ख़ासियत है कि ये बाकियों से अलग यहां पैतिृक नहीं, बल्कि मातृवंशीय समाज है. यानी कि जहां पिता नहीं, बल्कि मां सारी संपत्ति और दौलत अपनी बेटी के नाम करती है. साथ ही यहां बच्चों के नाम के साथ भी उनकी मां का उपनाम जोड़े जाने की प्रथा है.

ndtv.com

मावलिननॉन्ग धीरे-धीरे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित हो रहा है. पिछले कुछ सालों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस गांव के आस-पास कई ऐसी ख़ूबसूरत जगहें हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. 

अगर आप भी इस ख़ूबसूरत गांव की सैर पर जाना चाहते हैं, तो इन ख़ूबसूरत जगहों पर जाना न भूलें- 

1- मावलिननॉन्ग वाटरफ़ॉल में पिकनिक

अगर आप पूरे परिवार के साथ शिलॉन्ग ट्रिप पर जाने का प्लान कर रहे हैं, तो मावलिननॉन्ग वाटरफ़ॉल एक परफ़ेक्ट पिकनिक डेस्टिनेशन है. ख़ासकर गर्मियों के मौसम में आप इस जगह पर सुबह से लेकर शाम तक परिवार के साथ पिकनिक का लुफ़्त उठा सकते हैं. 

2- ख़ूबसूरत प्राकृतिक पुल

इस गांव की एक और यूनीक चीज़ है, वो ये कि यहां एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए जिन पूलों का इस्तेमाल किया जाता है, उसे किसी ने नहीं बनाया है, बल्कि ये पुल प्राकृतिक रुप से बने हुए हैं. पेड़ों की जड़ों से बने ये पुल समय के साथ और मज़बूत होते जाते हैं. इन पुलों के बारे में कहा जाता है कि इस तरह के पुल पूरी दुनिया में सिर्फ़ मेघालय में ही देखने को मिलते हैं.

3- टी स्टॉल और ऑर्गेनिक फ़ूड के रेस्टोरेंट्स

मावलिननॉन्ग आने वाले पर्यटकों के लिए खाने से लेकर पीने की कई चीज़ें मिल जाएंगी, लेकिन यहां के ख़ास अंदाज वाले टी स्टॉल पर्यटकों को ख़ूब भाते हैं. मौसम चाहे ठंड का हो या फिर गर्मी का इन ख़ूबसूरत टी-स्टॉल पर पर्यटक चाय की चुस्की लेते हुए दिख सकते हैं. साथ ही यहां के रेस्टोरेंट्स में शुद्ध ऑर्गेनिक फ़ूड का आनंद भी ले सकते हैं.

4- भारत-बांग्लादेश बॉर्डर का Sky-View

मावलिननॉन्ग में पर्यटकों को बैंबू से बनी 85 फ़ीट ऊंचे मचान पर बैठकर शिलॉन्ग की प्राकृतिक ख़ूबसूरती को निहारना बेहद पसंद है. साथ ही भारत-बांग्लादेश बॉर्डर का भी बर्ड आई व्यू का मज़ा ले सकते हैं. इसके लिए आपको मात्र 10 रुपये ख़र्च करने होंगे. 

5- Church of Epiphany मावलिननॉन्ग की पहचान

100 साल पुराना ये ख़ूबसूरत चर्च मावलिननॉन्ग के आकर्षण का मुख़्य केंद्र है. इस चर्च का पुराना स्ट्रक्चर भी इसकी ख़ासियतों में से एक है. चारों ओर फ़ैली हरियाली और फूलों से सजे बगीचे इस चर्च की ख़ूबसूरती पर चार-चांद लगाने का काम करते हैं. 

6- ऐसे पहुंचे मावलिननॉन्ग

मावलिननॉन्ग गांव शिलॉन्ग से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. आप यहां तक सड़क मार्ग से भी पहुंच सकते हैं. देश के किसी भी कोने से गुवाहाटी तक ट्रेन से पहुंचा जा सकता है, जबकि यहां से टेक्सी लेकर 172 किमी दूर मावलिन्नोंग पहुंचा जा सकता है. आप चाहें तो देश के किसी भी हिस्से से हवाई सफ़र द्वारा भी शिलॉन्ग तक पहुंच सकते हैं.

अगर आप भी किसी हिल स्टेशन की ट्रिप पर जाने का प्लान कर रहे हैं, तो इस बार शिलॉन्ग में स्थित एशिया के इस गांव की सैर ज़रूर करें.