कोरोना लॉकडाउन में बहुत से लोगों ने परेशानियों का सामना किया. इस दौरान कई लोगों के रोज़गार चले गए तो बहुत से लोग ऐसे भी थे, जिन्हें अपना बिज़नेस बंद करना पड़ गया. मुंबई के एक शेफ़ पंकज नेरुरकर भी ऐसे ही लोगों में से एक थे. पंकज मुंबई के प्रभादेवी इलाके में अपना ‘खड़पे’ नाम का रेस्टोरेंट चलाते थे. उनका ये रेस्टोरेंट मालवणी खाने के लिए काफ़ी फ़ेमस था. लेकिन कोरोना महामारी के चलते उन्हें अपने रेस्टोरेंट पर ताला लगाना पड़ा. हालांकि, इसके बाद भी पंकज टूटे नहीं और आज वो बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

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दरअसल, लोग उनके रेस्टोरेंट से वाकिफ़ थे. ऐसे में पकंज ने दोबारा से अपना बिज़नेस शुरू करने का एक अनोखा तरीका निकाला. अपने पुराने कस्टमर्स के लिए उन्होंने घर से ही खाना बनाकर बेचना शुरू किया. लेकिन ये तरीका उतना कारगर साबित नहीं हुआ. फिर पंकज ने इस काम के लिए अपनी नैनो कार का सहारा लिया. वो अपनी पत्नी की मदद से घर पर खाना बनाकर कार से ले जाने लगे. उन्होंने इसे ‘नैनो फ़ूड’ नाम दिया.

पंकज ने अपनी कार पर एक सफ़ेद रंग का पोस्टर लगाया हुआ है, जिस पर खाने का मेन्यू दिया हुआ है. पंकज के ‘नैनो फ़ूड’ का स्वाद चखने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. लोग ऑनलाइन भी फ़ूड ऑर्डर करते हैं. आज पंकज इसी कार से एक लाख रुपये महीना तक कमा रहे हैं. 

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फ़ाइवस्टार होटलों में बतौर शेफ़ कर चुके हैं काम 

पंकज क़रीब दो दशकों तक अलग-अलग फ़ाइव स्टार होटल्स में बतौर शेफ़ काम कर चुके हैं. 2017 में उन्होंने मालवानी खाने का खड़पे नाम का रेस्टोरेंट शुरू किया था. इसके लिए उन्होंने अपनी सारी सेविंग्स लगी दी. सब ठीक चल रहा था, तो उन्होंने 2019 में एक दूसरा आउटलेट भी खोल लिया. लेकिन लॉकडाउन की वजह से उनका बिज़नेस बंद हो गया. 

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इस दौरान पंकज कई नकारात्मक विचारों से घिर गए, लेकिन फ़ैमिली को सपोर्ट करने की उनकी इच्छा ने उन्हें दोबारा खड़े होने की हिम्मत दी. इसी का नतीजा है कि पंकज आज अच्छी कमाई कर रहे हैं और उनके कई पुराने कस्टमर्स भी वापस लौट आए हैं. पंकज भी उनके नैनो फ़ूड को मिल रहे रिस्पांस से काफ़ी ख़ुश हैं. 

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पंकज के इस फ़ूड ज्वाइंट पर सुबह 7:30 बजे ब्रेकफ़ास्ट, दोपहर 12:30 बजे लंच और रात 7:30 डिनर मिलता है. हर रोज़ यहां क़रीब 150 कस्टमर्स आते हैं. इससे वो क़रीब एक लाख रुपये महीना कमा रहे हैं. हालांकि, वो कहते हैं कि अभी एक लंबा रास्ता तय करना है. 

पंकज की सफ़लता इस बात का सबूत है कि हालात चाहे कितने भी ख़िलाफ़ क्यों न हो, अगर हमने हिम्मत बनाए रखी तो बड़ी से बड़ी चुनौती को एक सुनहरा अवसर बदलने में देर नहीं लगती.