भारत के हर शहर का अपना एक इतिहास है. किसी भी शहर का इतिहास उसके होने का वजूद और आगे बढ़ते रहने की कड़ी होती है.

आज हम आपको महाराष्ट्र के पूना यानि कि पुणे शहर के बीते समय में लेकर जाएंगे. आज पुणे भारत का आठवां सबसे बड़ा शहर व महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. आइए देखते हैं 1700 से 1800 के दशक के बीच ये शहर कैसा दिखता था?  

1. शनिवार वाड़ा  

shanivar vada
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'शनिवार वाड़ा' पुणे की सबसे प्रतिष्ठित स्मारक है. 1732 में पेशवाओं द्वारा निर्मित इस क़िले में1828 के दौरान आग लग गई थी, जिस वजह से इसको काफ़ी नुक़सान पहुंचा है. ये तस्वीर 1860 की है. फल और सब्ज़ी बाज़ार की हलचल के बीच ये क़िला मराठाओं की प्रतिष्ठा को दर्शाता है.  

2. एमजी रोड  

MG Road
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आज के पुणे शहर के शोर-गुल से दूर 'एमजी रोड' की ये सड़क एक दम शांत हैं, जो शहर की ख़ूबसूरती को दोगुना करने का काम कर रहा है.

3. मंडई  

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ये महात्मा फ़ुले मंडई या मंडई शहर का सबसे लोकप्रिय खुदरा बाज़ार है. शहर के केंद्र में स्थित ये प्रतिष्ठित इमारत शुक्रवार पेठ में स्थित है. ये इमारत ब्रिटिश औपनिवेशिकों के समय से लेकर आज तक शहर की शान है.

4. पुणे विश्वविद्यालय 

pune university
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सन 1948 में स्थापित 'पुणे विश्वविद्यालय' अब देश का एक प्रमुख अनुसंधान एवं शिक्षण केंद्र बन गया है. क़रीब 400 एकड़ में फ़ैला ये विशाल परिसर को एक समय में सरकारी निवास बनाने की भी बात चल रही थी. 

5. यरवदा जेल 

yervda prison
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इस जेल का निर्माण 1871 में अंग्रेज़ों द्वारा किया गया था. इस जेल में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों को क़ैद किया गया था.  

6. पार्वती पहाड़ी 

parvati hill
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सन 1876 में 'द प्रिंस ऑफ़ वेल्स' ने हाथी पर सवार होकर 'पार्वती हिल' का दौरा किया था. पहाड़ पर चढ़ाई के लिए 103 कदमों को इस तरह से बनाया गया था, ताकि हाथियों के लिए पहाड़ी पर चढ़ना आसान हो सके. समुद्र तल से पहाड़ी की ऊंचाई 2,100 फ़ीट है. 

7. भवानी पेठ 

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भवानी पेठ का इतिहास ब्रिटिश राज से भी पहले का है. इस पेठ का नाम 'देवी भवानी' के नाम पर रखा गया है. इसका निर्माण 1763 में किया गया था. ये जगह पुराने पुणे के सबसे लोकप्रिय और भीड़-भाड़ वाले इलाक़ों में से एक है. 

8. पुणे रेलवे स्टेशन 

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पुणे रेलवे स्टेशन की स्थापना 1858 में हुई थी. उस दौर में एक ट्रेन खंडाला तक, तो दूसरी शोलापुर तक का सफ़र तय करती थी. पुणे-मिराज लाइन 1886 में पूरी हुई थी. वर्तमान रेलवे स्टेशन को 1925 में बनाया गया था.

9. बुंद गार्डन  

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सन 1867 में फिजराल्ड़ ब्रिज पूरा होने के बाद 1869 में इस गार्डन को खोला गया था. इसकी योजना कर्नल सेलन ने बनाई थी. ये रेलवे स्टेशन से थोड़ी सी ही दूरी पर स्थित है.  

10. खडकवासला बांध

Khadakwasla Dam
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ये बांध 'मुठा नदी' पर निर्मित है. 1961 में दीवार के टूटने से पहले ये तस्वीर ली गई थी, जिसके कारण 1961 में बड़े पैमाने पर यहां बाढ़ आई थी.