आमतौर पर भी सार्वजनिक शौचालय के प्रयोग से लोग हमेशा ही बचते हुए आए हैं. लोगों को हमेशा ही ये शिकायत रहती है की सार्वजनिक शौचालाय में साफ़-सफाई को ख़ासा नज़रअंदाज़ किया जाता है. उस पर अब जब कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा है तो ये और मुश्किल हो जाता है.

जिस तरह कोरोना के अनुसार हमारी आस-पास की ज़िंदगी बदल रही है उसी तरह कोरोनाकाल में सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग भी बदल रहा है.

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नोएडा की रहने वाली रुमिता बनर्जी का मानना है कि जितना हो सके पब्लिक वॉशरूम के इस्तेमाल से अब हमें बचना चाहिए,

''पोस्ट कोरोना वॉशरूम इस्तेमाल करना बहुत मुश्किल हो जाएगा. मुझे लगता है पेशाब करने वाले उपकरण जो महिलाओं को खड़े हो कर पेशाब करने में मदद करते हैं या कीटाणुनाशक स्प्रे ऐसे समय में काफ़ी मददगार होंगे. हालांकि, मैं व्यक्तिगत रूप से कोशिश करूंगी और जितना संभव हो इससे बच सकूं क्योंकि हम इन चीजों के बारे में निश्चित नहीं हो सकते हैं.''

वहीं, जामिया नगर की निवासी आलिया कुलसूम जिन्होंने दोबारा काम पर जाना शुरू कर दिया है उनका कहना है,

''अब हालात काफ़ी अलग हैं. मैं अपने कार्यस्थल पर वॉशरूम का उपयोग करने से बच नहीं सकती लेकिन मैं इसका उपयोग करते समय आवश्यक सावधानी बरतने की कोशिश करती हूं. मैं हमेशा हैंडल पर टिशू पेपर का उपयोग करके दरवाज़ा खोलती हूं और मैंने सार्वजनिक साबुन के डिस्पेंसर से बचने के लिए ख़ुद का पेपर सोप ले जाना शुरू कर दिया है.''

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दूसरी तरफ़ पब्लिक वॉशरूम में काम करने वाले लोग यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सख्त नियमों के साथ आम जनता के लिए पूरी सुरक्षा और सावधानी बरती जाए.

वार्ड नंबर 63 मालवीय नगर के एसडीएमसी के सैनिटरी इंस्पेक्टर देवेश कुमार गुप्ता कहते हैं,

"हम सबसे पहले काम के लिए आने वाले कर्मियों सैनिटाइज़ करते हैं. सार्वजनिक उपयोग से पहले वाशरूम को अच्छी तरह से साफ़ और सैनिटाइज़ किया जाता है.केवल दो से तीन लोगों को ही वॉशरूम के अंदर जाने की अनुमति है और सोशल डिस्टेंसिंग को सुनिश्चित करने के लिए वॉशरूम के बाहर सर्किल बनाए गए हैं. बिना मास्क के किसी को भी वॉशरूम इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है. यदि, कोई ऐसा करता हुआ पकड़ा गया तो उस व्यक्ति पर ₹ 100 से ₹ 1000 तक का चालान लगता है. यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी सावधानियां बरती जा रही हैं, वॉशरूम के बाहर भी एक कर्मचारी खड़ा रहता है."

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उचित सावधानी बरती जाए तो डरने की कोई बात नहीं है. डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. रचित भूषण के अनुसार सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करते समय लोगों को इन बातों का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

1. अपना हाथ धोएं: वॉशरूम के इस्तेमाल के बाद अपना हाथ अच्छे से साबुन और पानी से धोएं. अंदर और बाहर जाते समय कोशिश करें की अपने हाथों से दरवाज़े के हैंडल को न छुएं बल्कि किसी टिशू का इस्तेमाल करें.

2. अपना खुद का सैनिटाइज़र अपने साथ रखें: वॉशरूम में उपलब्ध होने के बावजूद सैनिटाइज़र की अपनी बोतल ले जाना बहुत आवश्यक है.

3. सतहों को छूने से बचें: जितना हो सके स्तहों को न छूने की आदत डालें. और अगर किसी स्तह को छू लिया है तो तुरंत हाथ धोएं. अपना सामान भी वॉशरूम के टेबल टॉप पर रखने से बचें.

4. फ़्लश करने से पहले कमोट बंद करें: ध्यान रहे की फ़्लश करते समय आप कमोट के लिड को बंद कर दें. यदि किसी प्रकार की कोई लिड नहीं है तो अपना मुंह दूर रखें इसके साथ ही जल्द से जल्द वहां से निकले.