Hippocratic Oath: भारत में मेडिकल छात्र अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रेजुएशन सेरेमनी के दौरान ‘हिप्पोक्रेटिक शपथ’ (Hippocratic Oath) लेते हैं, जिसके तहत उन्हें कुछ नियमों का पालन आजीवन करना होता है. इस शपथ का संबंध यूनान के हिप्पोक्रेट्स नाम के एक बहुत बड़े चिकित्सक से है, जिन्होंने डाक्टरों के लिए कुछ ज़रूरी गाइडलाइंस बनाई थीं. बीते सोमवार यानि 7 फरवरी को शीर्ष चिकित्सा शिक्षा नियामक (Apex Medical Education Regulator) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission (NMC) ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों के साथ वर्चुल बैठक की. इस बैठक के दौरान इसका नाम ‘हिप्पोक्रेटिक शपथ’ (Hippocratic Oath) से बदलकर ‘चरक शपथ' कर दिया है. चरक नाम आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक के नाम पर रखा गया है. अब इस शपथ के नाम को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

Hippocratic Oath
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Hippocratic Oath

चलिए जान लेते हैं आख़िर हिप्पोक्रेटिक शपथ है क्या और उसके अंतर्गत क्या-क्या गाइडलाइंस आती हैं?

460 से 377 ईसा पूर्व के दौरान यूनान में वेस्टर्न मेडिसिन के जनक हिप्पोक्रेट्स ने डाक्टर्स के लिए कुछ सिद्धांत बनाए, जिनकी शपथ डाक्टर्स को उनके ग्रेजुएशन सेरेमनी के दौरान दिलाई जाती थी. समय बदला दौर बदला इन सिद्धांतों को ‘हिप्पोक्रेटिक शपथ’ नाम दे दिया गया. बदलते वक़्त के साथ इस शपथ में कई ज़रूरी और हितकारी संशोधन किए गए हैं. अब इस शपथ को 'चरक शपथ' के नाम से जाना तो जाएगा, लेकिन इस पर असहमति और सहमति दोनों जताई जा रही हैं.

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इस शपथ के कई रूप हैं, जिसमें सबसे ज़्यादा इसके ग्रीक भाषा में लिखे सिंद्धातों को पालन किया जाता है. तो कई जगहों पर जिनेवा घोषणा (Declaration of Geneva) या मैमोनाइड्स की शपथ (Oath Of Maimonides) दिलाई जाती है. हालांकि, नाम अलग हैं लेकिन सिद्धांत दोनों ही हिप्पोक्रेट हैं. दुनिया के हर मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों को ये शपथ दिलाई जाती है और ये शपथ लेना बहुत ज़रूरी होती है. चरक शपथ लेने के अलावा, सभी MBBS फ़्रेशर्स को 10 दिनों तक दिन में एक घंटे की योगा ट्रेनिंग करनी होती है.

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शपथ की शुरुआत ग्रीक देवता ‘अपोलो’ की शपथ से होती है. इस शपथ के दौरान डॉक्टर्स कई बातों को आजीवन करने की और न करने की कसम लेते हैं. जैसे एक डॉक्टर को अपने ज्ञान और समझ को दूसरे डॉक्टर से साझा करना इस शपथ के अंतर्गत आता है. तो वहीं दूसरी कसम ये होती है कि कभी भी कोई डॉक्टर अपने उपचार का ग़लत इस्तेमाल नहीं करेगा, वो हमेशा मरीज़ की भलाई के लिए ही अपनी शिक्षा का इस्तेमाल करेंगे. साथ ही, न तो ग़लत दवा देंगे और न ही गर्भपात करेंगे, लेकिन बदलते दौर की मांग को देखते हुए शपथ में कुछ संशोधन किए गए ताकि समाज और समाज के लोगों के हित में काम किया जा सके.

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इसके अलावा, ये भी शपथ लेते हैं कि अगर किसी डॉक्टर से मरीज़ का इलाज नहीं हो पा रहा है तो वो अपनी स्वेच्छा से दूसरे डॉक्टर या विशेषज्ञ को सर्जरी या इलाज करने की अनुमति देगा. ‘हिप्पोक्रेटिक शपथ’ के दौरान डॉक्टर्स ये भी कसम खाते हैं कि वो अपने मरीज़ की डिटेल्स किसी को भी नहीं देंगे, उसे गोपनीय रखेंगे. डॉक्टर कभी भी उसकी स्थिति या उसके इलाज के तरीक़े को किसी से भी शेयर नहीं करेंगे.

हालांकि, 'हिप्पोक्रेट ओथ' (Hippocratic Oath) को 'चरक शपथ' में बदलने के निर्णय पर लोगों ने भी अपनी ख़ूब प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ लोगों ने इस बदलाव की सराहना की है तो कुछ लोगों ने निंदा.