हिमालय की घाटी में एक छोटा सा गांव हैं, जिसका नाम है 'चिटकुल'. यहां की आबो-हवा और प्राकृतिक नज़ारे ऐसे हैं कि इन्हें देख कर आप यही कहेंगे कि प्रकृति ने बड़ी ही फुरसत में इसे बनाया है. देवभूमि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में बसा ये गांव देश का अंतिम गांव भी कहलाता है.

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चिटकुल तिब्बत और भारत की सीमा पर बसा वर्ल्ड फ़ेमस गांव हैं. यहां के प्राकृतिक नज़ारों को देखने और एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद लेने के लिए पूरी दुनिया से सैलानी पहुंचते हैं. शिमला या मनाली जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और सुकून से अपनी छुट्टियां बिताने के लिए आप चिटकुल का रूख कर सकते हैं.

चिटकुल कैसे जाएं और वहां क्या कर सकते हैं इसकी डिटेल्स भी हम लेकर आए हैं.

कैसे पहुंचे चिटकुल?

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चिटकुल से नज़दीकी एयरपोर्ट शिमला है. वहां से 8-9 घंटे का सफ़र(बस-टैक्सी) कर आप चिटकुल पहुंच सकते हैं. इसके अलावा चंडीगढ़ से बस मिलती है जो 11 घंटे में आपको यहां तक पहुंचा देगी.

कब जाएं?

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चिटकुल जाने का बेस्ट टाइम मई से अक्टूबर है. सर्दियों के दिनों में यहां पहुंचने वाले रास्ते बर्फ़ से ढक जाते हैं, जिससे यहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है.

कहां घूमें?

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यहां पर आप सांगला वैली के कामरू गांव में बने कामरू के किले में घूम सकते हैं. इसे 15वीं शताब्दी में लकड़ी से बनाया गया था. इसके अलावा बसपा नदी की सुंदर-सुंदर घाटियों की सैर की जा सकती है. साथ ही हिंदुस्तान के आख़िरी ढाबे में बैठकर पहाड़ी खाने का लुत्फ़ उठा सकते हैं.

कहां ठहरें?

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चिटकुल में ठहरने और खाने की उचित व्यवस्था है. आप चाहे तो गांव वालों के बनाए छोटे कमरों में रह सकते हैं या फिर किसी फ़ाइव स्टार होटल में. इसके लिए आपको 500-5000 रुपये तक प्रति दिन खर्च करना होगा. रही बात खाने की तो यहां कई होटल हैं जो अपने स्पेशल पहाड़ी खाने के लिए फ़ेमस हैं. आप यहां पर किन्नौर की स्पेशल चाय से लेकर यहां की फ़ेमस मटन करी का स्वाद चख सकते हैं.

अबकी बार हिमालय की वादियों में घूमने का प्लान बने तो चिटकुल जाने का ही प्लान बनाना.


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