नवाबों के शहर लखनऊ की नॉनवेज से मोहब्बत जगज़ाहिर है. यहां बिरयानी से लेकर बेहतरीन निहारी और लाजवाब कबाब तक खाने को मिलते हैं. अब ये लखनऊ की ख़ासियत है कि यहां एक प्लेट खाने के साथ पतीला भर क़िस्से सुनाए जाते हैं. तो बस आज हम भी एक ऐसी ही ज़बरदस्त डिश के बनने का क़िस्सा आपको बताएंगे, जिसका नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाता है. इस डिश का नाम है ‘काकोरी कबाब’.

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जी हां, प्रसिद्ध 'काकोरी कबाब' के बनने के पीछे एक बड़ा ही दिलचस्प क़िस्सा है. कहते हैं कि, एक बार दावत में नवाब साहब के खाने को एक अंग्रेज़ अधिकारी ने बेकार बता दिया, जिसके बाद रकाबदारों (अवध के रसोइयों) ने 'काकोरी कबाब' की शुरुआत की.

दरअसल, सैकड़ों साल पहले लखनऊ के पास काकोरी में नवाब सैयद मोहम्मद हैदर काज़मी ने आम के सीज़न में एक दावत रखी, जिसमें उन्होंने एक अंग्रेज़ अधिकारी को भी बुलाया. नवाब ने सींक कबाब समेत अवध का सबसे बेहतरीन खाना उन सभी को परोसा. लेकिन नवाब की मेहमान नवाज़ी को तब झटका लगा, जब उस अंग्रेज़ अधिकारी ने सींक कबाब को बेकार बता दिया.

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अंग्रेज़ अधिकारी की टिप्पणी नवाब साहब को इतनी बुरी लगी कि उन्होंने तुरंत अपने रसोइये को तलब किया और उसे सबसे बेहतरीन कबाब बनाने का हुक़्म दे डाला. इसके बाद रसोइये के प्रयास से जो बना उसे आज 'काकोरी कबाब' के नाम से जाना जाता है. इसके 10 दिन बाद काकोरी गांव में नई तरह का कबाब तैयार होने लगे.

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क्या ख़ासियत है काकोरी कबाब की?  

काकोरी कबाब की बनावट बेहद बारीक, मुलायम और चिकनी थी. ये क़बाब ऐसे थे कि बस मुंह में रखते ही घुल जाते थे. मीट को सॉफ़्ट बनाने के लिए जहां Maliabali आम का इस्तेमाल किया गया. वहीं, इसे ज़ायकेदार बनाने के लिए ढेर सारे मसाले डाले गए. 

बस इसके बाद तो काकोरी कबाब का ज़ायका काकोरी से आगे निकलकर पूरे अवध के ज़बान पर चढ़ गया. तब से इसकी लोकप्रियता वैसी की वैसी ही बनी हुई है.