अगर मन में जज़्बा और हौसलों में दम हो तो कोई भी मंज़िल पाना मुश्क़िल नहीं है. शरीर की कमी भी उसे नहीं रोक पाती है. ऐसा ही कुछ अजय लालवानी (Ajay Lalwani) ने साबित किया है. हौंसले और जज़्बे से भरे अजय लालवानी अपनी कमी को दर किनार कर ज़िंदगी को पूरे आत्मविश्वास के साथ खुलकर जीना पसंद करते हैं. 25 वर्षीय अजय लालवानी (Ajay Lalwani) मुंबई के रहने वाले हैं.

Ajay Lalwani Cyclist
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Ajay Lalwani

दरअसल, अजय लालवानी (Ajay Lalwani) दृष्टिबाधित (Visually Impaired) हैं, और वो देश में सड़क सुरक्षा (Road Safety) और सड़कों पर पर्याप्त रौशनी की आवश्यकता को लेकर लोगों को जागरूक करने में लगे हैं. इसी के चलते वो 45 दिनों में अभी तक 7500 किलो मीटर साइकिल चलाकर 12 स्टेट कवर कर चुके हैं. अजय ने अपने ज़िंदगी की कमी को अपना कर अपनी ज़िंदगी को जीना सीखा है और वो दूसरों को भी यही संदेश देते हैं. अजय (Ajay Lalwani) अभी तक साइकिलिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, स्वीमिंग सहित कई खेलों में अपना शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं.

Road Safety Awareness
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अजय ने अपनी इस जागरुकता यात्रा को 15 नवंबर से मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया से शुरू किया था. इसका उद्देश्य देश में सड़क सुरक्षा और नेत्रहीनों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना था. इसके बाद, अगले दिन 16 नवंबर को वो गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा क्षेत्र नवसारी पहुंचे थे. अजय लालवानी (Jay Lalwani) के पास 18 सदस्यों की टीम है, जिनके पास दो कार हैं और ये टीम अजय को साइकिल चलाने में उनका मार्गदर्शन करती है. 

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अजय का कहना है कि,

वो ख़ुद को इस लायक बनाना चाहते हैं कि वो सब काम कर सकें जो दुनिया के हिसाब से उनके लिए करना असंभव है. इसी के चलते उन्होंने अपनी इस यात्रा को शुरू किया है.
Ajay Lalwani
Source: indianexpress

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,

अजय लालवानी ने अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से शुरु करी, जिसके तहत उन्होंने श्रीनगर से कन्याकुमारी होते हुए 12 राज्यों का सफ़र किया. उनकी ये साइकिल यात्रा 45 दिन की थी. इससे पहले अजय इस जागुरक यात्रा के तहत दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके हैं, जो मुंबई-गोवा-मुंबई और दादर-गोंदिया-दादर की यात्रा थी.
Ajay Lalwani
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मीडिया से बात करते हुए अजय ने कहा,

उन्होंने इस यात्रा को एक चुनौती के तौर पर लिया था. एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के ज़रिए सड़क सुरक्षा के बारे में लोगों को जागरुक करना बहुत बड़ी बात है. इस यात्रा के ज़रिए वो लोगों को बताना चाहते थे कि नेत्रहीन भी ज़िंदगी को अपने तरीक़े से जी सकते हैं और सामान्य लोगों की तरह ही देश के लिए भी अपना यौगदान दे सकते हैं, लेकिन वो लोग जितना करना चाहते हैं उतना उन्हें किसी का भी समर्थन और सहयोग नहीं मिलता है. हालांकि, अजय के इस अभियान को बहुत सारे प्रायोजकों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने अपने जज़्बे को कम नहीं होने नहीं दिया और अपने हौसले के साथ इस यात्रा को शुरू कर दिया.
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आपको बता दें, अजय लालवानी नेशनल लेवल के पैरा खिलाड़ी हैं. इन्होंने जूडो और कबड्डी में नेशनल लेवल पर पैरा-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में कई मेडल जीते हैं.