पूरा विश्व हर रोज़ कोरोना वायरस से लड़ने में जुटा हुआ है. अब तक विश्व में 8,264,468 से ज़्यादा लोग इस वायरस का शिकार हो चुके हैं. वहीं 4,321,998 लोग वायरस को मात दे कर ठीक हो चुके हैं.

ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठना लाज़मी है कि आपके शरीर पर इस वायरस के लम्बे वक़्त में किस तरह के लक्षण होंगे?

ख़ैर, बोलना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि ये वायरस अभी भी वैज्ञानिकों के लिए नया है. ऐसे में सबसे सही जवाब ख़ुद इस वायरस के रोगियों से आता है जिन्हें ठीक हुए एक लम्बा वक़्त हो गया है और वो अपने जीवन में इसके लक्षण महसूस कर रहे हैं.

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अधिकांश लोग कुछ हफ्तों के भीतर ठीक हो जाते हैं. मगर लंबे समय तक प्रभाव का अनुभव करने वाले लोगों के लिए, सबसे आम मुद्दे थकावट, सिरदर्द, चिंता और मांसपेशियों में दर्द के लक्षण हैं जो कम से कम कई हफ़्तों तक रह सकते हैं.

जिन मरीज़ो को गहन देखभाल की आवश्यकता होती है, साथ ही वो जिनको वेंटिलेटर या किडनी डायलिसिस पर रखा जाता है वो अधिक गंभीर लक्षण का अनुभव कर सकते हैं.

निमोनिया विकसित करने वाले मरीज़ों में फ़ेफ़ड़े पर घाव के निशान पड़ सकते हैं. दिल की सूजन, अनियमित दिल की धड़कन, बिगड़ती किडनी और लिवर जैसे लक्षण भी पाए गए हैं.

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हॉन्ग कॉन्ग के डॉक्टरों ने पाया है कि जो भी लोग वायरस संक्रमण से ठीक हो जाते हैं, उनके फ़ेफ़ड़े काफ़ी हद तक कमज़ोर हो जाते हैं. थोड़ा सा तेज़ चलने पर वो हांफ़ने लगते हैं.

हॉन्ग कॉन्ग अस्पताल के अधिकारियों ने पाया कि 12 में से 3-4 लोगों की फ़ेफ़ड़ों की क्षमता काम पाई गई है.

जिन मरीज़ों को गहन देखभाल पर रखा गया था उन्हें घर पर कभी-कभी ऑक्सीज़न थेरेपी या डायलिसिस की ज़रूरत पड़ती है.

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जिन मरीज़ों की हालत हॉस्पिटल में बेहद गंभीर थी या उन्हें लम्बे समय तक हॉस्पिटल में बेहोश रखा गया या लम्बे वक़्त तक ICU में रहना पड़ा हो, उनमें Post-Intensive Care Syndrome नामक स्थिति विकसित हो जाती है. ऐसे में उनकी माशपेशियों में दर्द होने लगता है, इतना ही नहीं उनकी याद्दाश्त पर भी असर पड़ता है.

कोरोना वायरस के संक्रमण दौरान और बाद में भी खून के थक्के विकसित हो सकते हैं जिसकी वजह से कभी-कभी स्ट्रोक लग सकता है. कम गंभीर मामलों में भी डॉक्टर Blood Thinners लेने की सलाह देते हैं. इसके साथ ही रक्तस्राव के जोख़िम को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता होती है.

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न्यू यॉर्क में फ़िंस्टीन इंस्टीट्यूट फ़ॉर मेडिकल रिसर्च के डॉ. थॉमस मैकगिन, जो की Covid -19 के सबसे बड़े अमेरिकी अध्ययन में शामिल थे का कहना है कि अधिकांश लक्षण समय अंत में चले जाते हैं.

'सवाल बस कब का है. कुछ मरीज़ों में दूसरों की तुलना अधिक समय लग सकता है.'