Difference Between Katta And Tamancha: सोशल मीडिया पर आपने अक्सर हाथ में ‘कट्टा’ और ‘तमंचा’ लहराते हुए कई रंगबाज़ों को भौकाली झाड़ते हुए देखा होगा. इनके अंदर क़ानून का भी कोई डर नहीं होता. देश के कई राज्यों में ये ‘कट्टा’ और ‘तमंचा’ अवैध तरीके से बनाए और बेचे जाते हैं. पिस्टल की तरह दिखने वाले ये दोनों हथियार पिस्टल जितने कारगर तो नहीं होते, लेकिन किसी भी इंसान की जान लेने के लिए काफ़ी हैं. आज हम आपको इन्हीं दो अवैध हथियारों के बारे में बताने जा रहे हैं.

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What is the Difference Between Katta And Tamancha?

‘तमंचा और कट्टा’ एक ख़ास तरह की देसी पिस्तौल हैं. असल में ये एक अवैध हथियार है. यूपी, बिहार और एमपी में इसका बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार होता है. इन तीनों ही पड़ोसी राज्यों में कट्टे और तमंचे 1 हज़ार से लेकर 25 हज़ार रुपये तक में उपलब्ध हो जाते हैं. कुछ लोग चोरी छुपे अपने घर में ही ‘तमंचा और कट्टा’ तैयार भी कर लेते हैं. इनके बनने में किसी भी तरह की तकनीक विशेषज्ञता नहीं चाहिए होती है. इसे कोई भी अवैध तरीक़े से अपने घर में बना लेता है. इसलिए इनकी कोई जवाबदारी या गारंटी भी नहीं होती. सामान्य रूप से इन दोनों में कुछ ख़ास फ़र्क नहीं होता.

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चलिए जानते हैं ‘कट्टे और तमंचे’ में क्या अंतर होता है

क्या है ‘कट्टे’ ख़ासियत?

‘कट्टा’ लोहे को काटकर लोग ख़ुद से बना लेते हैं. इसमें लोहे का पाइप काटकर 12 बोर की एक ‘बैरल’ बनाई होती है. इसे बंदूक में इस्तेमाल होने वाली गोलियों डालकर भी चलाया जा सकता है. कट्टे के बैरल यानी नली के अनुसार ही गोलियां तय की जाती हैं. कारीगर इसके हिसाब से ख़ुद ही गोलियां भी तैयार कर लेते हैं. कट्टे की रेंज काफ़ी नज़दीक की होती है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता न के बराबर होती है. इसकी नली फटने से ये लोगों को घायल भी कर देती है.

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क्या है ‘तमंचे’ ख़ासियत?

‘तमंचा’ भी कट्टे की तरह ही हैंडगन है. ये देसी तरीके से बनाई गई कट्टे का अपग्रेड वर्ज़न होता है. तमंचा आमतौर पर 15 बोर का होता है. इसकी रेंज भी काटते से ज़्यादा होती है. इसके एक वार से ही इंसान की जान जा सकती है. बाकी मामलों में ये कट्टे की तरह ही होता है. इसकी विश्वसनीयता भी ज़ीरो होती है. नली कट्टे की तरह ही तमंचे की नाली फटने से ये लोगों को घायल भी कर देती है.

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बाज़ारों में खुलेआम मिलता है कट्टा बनाने का सामान

आज भी देश में कट्टा बनाने के लिए बाज़ारों में आसानी से खुलेआम सामान मिल जाता है. क्रिमिनल प्रवृति के लोग अपनी ज़रूरत के अनुसार पुलिस से छुपकर कट्टा तैयार करा लेते हैं. यूपी, बिहार और एमपी में ऐसे सैकड़ों अवैध कारोबारी हैं जो अपराधियों को 1 हज़ार रुपये से लेकर 25 हज़ार रुपये में कट्टा और तमंचा उपलब्ध कराने का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं. इन्हें बनाने में पुरुषों के अलावा महिलाएं और बच्चे का भी इस्तेमाल किया जाता है. 

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