पृथ्वी अपनी धुरी पर हर रोज़ घूमती है. इसमें धरती को 23 घंटे, 56 मिनट और 4.09 सेकेंड का समय लगता है यानि क़रीब 24 घंटे का. इस वजह से ही दिन-रात बदलते हैं. वहीं, सूरज का चक्कर काटने में धरती को 365 दिन 6 घंटे 48 मिनट और 45.51 सेकेंड का समय लगता है. मौसम वगैरह इसी वजह से बदलते हैं. ख़ैर, ये सब तो आप स्कूल में रट ही लिए होंगे. मगर आपने कभी सोचा है कि धरती अगर इस तरह घूमना बंद कर दे, तो क्या होगा?

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पृथ्वी अपनी धुरी पर 1000 माइल प्रति घंटे की स्पीड से घूमती है. ये क़रीब 1670 किमी प्रति घंटा है. हालांकि, हमें इसका एहसास नहीं होता. क्योंकि हम भी उसके साथ उसी गति से घूम रहें हैं. मगर तब क्या होगा, जब पृथ्वी अचानक घूमना बंद कर दे . क्या तब भी हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा?

अगर पृथ्वी अचानक घूमना बंद कर दे

वैज्ञानिकों की माने तो अगर पृथ्वी अचानक घूमना बंद कर दे , तो प्रलय आ जाएगी. इसके पीछे वजह है कि धरती का संतुलन बिगड़ जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक धरती का रूकना प्रलय लाएगा. क्योंकि, धरती का जो हिस्सा सूरज की ओर होगा, वहां तो तेज़ गर्मी लगातार पड़ेगी. वहीं, दूसरी ओर सूरज की किरणें न पहुंचने से अत्यधिक ठंड हो जाएगी. एक तरफ़ हमेशा दिन रहेगा, तो दूसरी ओर रात कभी ख़त्म नहीं होगी. 

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वहीं, समंदर का पानी धीरे-धीरे ऊपर की तरफ़ बढ़ने लगेगा. सभी जगह पर सामान मात्रा में बटने लग जाएगा. नार्थ और साउथ पोल पानी में डूब जाएंगे. इसका परिणाम ये होगा कि उत्तर में कनाडा पूरी तरह से पानी के नीचे होगा. मोटे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका ग्रीनलैंड समेत साइबेरिया, एशिया और यूरोप के उत्तरी मैदान पानी के नीचे होंगे. वाष्पीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी, जिसका असर इंसान, जानवर, जंगल, ज़मीन सभी पर पड़ेगा.

ऐसा ही कुछ वैज्ञानिक Neil deGrasse Tyson ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा. उन्होंने बताया, अगर धरती ने घूमना बंद कर दिया, तो धरती पर जीवन ख़त्म हो जाएगा. टायसन ने कहा था, ‘ये विनाशकारी होगा. हम सभी पूर्व की पृथ्वी के साथ आगे बढ़ रहे हैं. अगर पृथ्वी घूमना रुक जाए तो हम सभी आगे की ओर गिर जाएंगे. माना जाता है कि इस स्थिति में पृथ्वी पर सभी मर जाएंगे. लोग खिड़कियों से बाहर उड़ रहे होंगे और वो पृथ्वी पर सिर्फ़ एक बुरा दिन होगा.'

अगर पृथ्वी तेज़ी से घूमने लगे?

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अगर धरती रुकने की बजाय तेज़ी से घूमने लगे, तो भी ये जीवन के लिए अनुकूल नहीं होगा. क्योंकि, जो एक दिन 24 घंटे का होता है, वो कम हो जाएगा. दिन-रात छोटे होने लगेंगे. हमारा वज़न भी कम लगने लगेगा, क्योंकि सेंट्राफ़्यूगल फ़ोर्स तेज़ होगा, जिससे ग्रैविटी पर असर पड़ेगा. साथ ही, मौसम में भी बदलाव देखने को मिलेगा. दोनों गोलार्द्धों को गर्म होने के लिए समय कम मिलेगा. 

तो बेहतर यही है कि धरती पर जैसी चल रही है, वैसी ही चले.