हमारी धरती पर जीवन है, क्योंकि यहां पर पानी है. मगर इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनकी लाइफ़ में पानी सुलभ नहीं है. वो एक-एक बूंद को तरसते हैं. ये हाल सिर्फ़ सूखाग्रस्त इलाकों का ही नहीं, बल्कि हमारे शहरों में रहने वाले बहुत से ग़रीब-मज़दूरों का भी है. दिनभर तपती गर्मी में काम करने वाले ये लोग अपनी प्यास बुझाने को यहां-वहां भटकते हैं. यूं तो इस बात को हम सब जानते हैं, मगर मदद कुछ लोग ही करते हैं. 69 साल के अलगराजनम नटराजन (Alagarathanam Natarajan) ऐसे ही लोगों में से एक हैं.

Alagarathanam Natarajan
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नटराजन एक कैंसर सर्वाइवर हैं और उन्हें लोग 'मटका मैन' (Matka Man) के नाम से जानते हैं. वो हर रोज़ सुबह-सुबह अपनी वैन से 70 मटकों में पानी भरने निकलते हैं, ताकि गर्मी में लोग अपनी प्यास बुझा सकें. 

आइए जानते हैं 'मटका मैन' (Matka Man) के नाम से मशहूर अलगराजनम नटराजन की कहानी-

40 साल बाद लंदन से लौटे भारत

मूल रूप से बेंगलुरु के रहने वाले नटराजन 40 साल बाद लंदन से भारत आए, तो दिल्ली में रहने लगे. वो कैंसर सर्वाइवर हैं, तो दूसरे कैंसर पेशेंट्स की मदद करने लगे. अनाथालयों के लिए भी वॉलियंटर का काम करते हैं. इस दौरान उन्हें ये देखकर हैरत हुई कि दिल्ली में कितने ऐसे लोग हैं, जिन्हें चिलचिलाती गर्मी में ठंडा पानी तक नसीब नहीं. 

Matka Man
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इसमें रेहड़ी-पटरी वाले, सड़क पर सफ़ाई करने वाले, रिक्शा चलाने वाले जैसे तमाम ग़रीब लोग हैं. अपनी आर्थिक स्थिति के चलते ये लोग मार्केट से पानी की बोतल ख़रीद कर नहीं पी सकते. ऐसे में नटराजन ने इन लोगों के लिए अपने घर के बाहर एक वाटर कूलर रख दिया. मगर उन्हें ये काफ़ी नहीं लगा. वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगोंं तक पानी पहुंचाना चाहते थे.

शहर में जगह-जगह लगा दिए मटके

ज़्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए नटराजन ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी के मटके लगा दिए. वो हर रोज़ सुबह ठंडा पानी लेकर अपनी वैन से निकलते हैं और क़रीब 70 मटकों में पानी भरते हैं. इस काम के लिए उन्होंने अपनी वैन को मॉडीफ़ाई भी करवाया. पानी वितरण के लिए नटराजन ने 800 लीटर की टंकी, पंप और जनरेटर से वैन को लैस किया. उनके इस नेक दिल काम ने उन्हें शहर में 'मटका मैन' (Matka Man) के नाम से फ़ेमस कर दिया.

Van
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बतौर नटराजन वो गर्मियों में अपनी वैन से चार बार दिन में जाकर पानी भरते हैं, ताकि मटके खाली न रहें. वो कहते हैं, 'गर्मियों के महीनों में मटके को एक दिन में लगभग 2,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है. पानी की आपूर्ति पास के एक स्कूल और दो अन्य भले लोगों द्वार की जाती है. बाकी पानी का इंतज़ाम मैं अपने घर से करता हूं. मैं अपनी वैन के साथ रोजाना इन स्टैंडों का रखरखाव करता हूं.'

मटका स्टैंड्स पर लिख रखा है अपना फ़ोन नंबर पर 

नटराजन ने सभी मटका स्टैंड्स पर अपना फ़ोन नंबर लिख रखा है, ताकि पानी ख़त्म होने पर उन्हें जानकारी मिल जाए. साथ ही, लोगों के बैठने के लिए उन्होंने बेंच का इंतज़ाम भी किया है. 

Delhi
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वो दूसरों से भी अपने घरों के बाहर मटके रखने का अनुरोध करते हैं, ताकि वो उन्हें भी भर सकें. नटराजन को रोज़ इस काम में तीन से चार घंटे लगते हैं. ऐसे में उन्होंने अब एक असिस्टेंट भी रख लिया है. बता दें, वो 40-50 किलोग्राम मौसमी फल और सब्जियां भी नियमित रूप से लोगों में बांटने की कोशिश करते हैं.

उनका मानना ​​है कि लोगों को दूसरों की परवाह करनी चाहिए. हम सभी के पास समाज को देने के लिए कुछ न कुछ होता है और हमें शेयर करना चाहिए. वाक़ई अलगराजनम नटराजन बहुत नेक काम कर रहे हैं और ऐसा 'मटका मैन' (Matka Man) हर शहर-गांव में होना चाहिए.