एस्ट्रोनॉट यानी अंतरिक्ष यात्री के बारे में तो आप जानते ही होंगे, वही जो धरती से कई मीलों दूर ब्रह्मांड से जुड़े राज़, मानव जाति के लिए विभिन्न संभावनाओं व अन्य चीज़ों का पता लगाने के लिए अंतरिक्ष का सफ़र करते हैं. इनकी दुनिया भी कई दिलचस्प तथ्यों से भरी पड़ी है. उनमें से एक तथ्य ये है कि जब एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष से धरती पर आते हैं, तो वो ठीक से चल नहीं पाते हैं यानी उन्हें चलने में दिक्कत का सामना (why astronauts can’t walk after landing) करना पड़ता है. ऐसा क्यों होता है, वो हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे.
आइये, अब जानते हैं कि आख़िर क्यों अंतरिक्ष से लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्री ठीक से चल नहीं पाते (why astronauts can’t walk after landing)
अंतरिक्ष में बदल जाती हैं सारी चीज़ें
जब धरती से एक एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में जाता है, तो उसे ज़ीरो ग्रेविटी में रहना पड़ता है. ज़ीरो ग्रेविटी की वजह से उसकी कई चीज़ें बदल जाती हैं, जैसे वो चल नहीं सकता. स्पेस स्टेशन के अंदर एक एस्ट्रोनॉट को हवा में तैरकर ही अपने सारे काम करने होते हैं. उनके खाने-पीने का तरीक़ा बदल जाता है. यहां तक कि उनकी मल निकासी की प्रकिया भी अलग हो जाती है.
क्यों होता है ऐसा?
जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट चल नहीं सकता(why astronauts can’t walk after landing). उसे अपने सारे काम तैरकर ही करने होते हैं. वहीं, इस माहौल में महीनों तक अंतरिक्ष में रहने की वजह से उनकी पैरों की मासपेशियां इनएक्टिव हो जाती हैं और कमज़ोर हो जाती है. इस वजह से वो जैसे ही अंतरिक्ष मिशन पूरा कर धरती पर लौटते हैं, तो उन्हें धरती की सतह पर पैर जमाने में दिक्कत होती है. उन्हें गोद में उठाकर या सहारे से साथ ले जाया जाता है.
एस्ट्रोनॉट की मेडिकल जांच
अंतरिक्ष मिशन के बाद जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में आते हैं, तो उन्हें कई दिक्कतों को सामना करना पड़ता है. जैसे शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत और ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव. इसके अलावा, देखने में उन्हें परेशानी होती है. इसलिए, उन्हें मेडिकल टेस्ट और कई घंटों तक ऑब्ज़रवेशन में रखा जाता है.
अंतरिक्ष यात्री Scott Kelly
यूट्यूब पर एक वीडियो उपलब्ध है जिसमें अंतरिक्ष मिशन से लौट कर आए अमेरीकी अंतरिक्ष यात्री Scott Kelly को चलने में दिक्कत का सामना करते देख साफ़ देखा जा सकता है. वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि उन्हें चलना तो दूर खड़े रहने में भी परेशानी हो रही थी. वहीं, डॉक्टरों को निगरानी में 6 घंटे के बाद भी उनके चलने की परेशानी बरक़रार थी. वहीं, 22 घंटों बाद वो खड़े और चल पाने में थोड़ा बहुत ठीक हुए थे.