इंसानों की कुछ आदतें ऐसी हैं, जिन्हें वो चाहकर भी नहीं बदल पाता. बबल रैप फोड़ने की खुजली भी उनमें से एक है. कोई भी सामान अगर बबल रैप में लिपटा आया, तो सामान किनारे और अपन बबल रैप चटचटाना शुरू कर देते हैं. मगर कभी आपने सोचा है कि वो क्या वजह है कि हमें बबल रैप को फोड़ने में इतना मज़ा आता है?

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दरअसल, एक स्टडी के मुताबिक, हमारे हाथ में जब कोई स्पंजी टाइप की छोटी चीज़ आती है तो अचानक हमारे हाथ उसको दबाने के लिए उत्सुक हो जाते हैं. ख़ासतौर से जब हम किसी तनावपूर्ण माहौल में काम करते हैं, तब हमारी किसी छोटी चीज़ को दबाने की इच्छा और भी बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए है कि जब हम किसी स्पंजी टाइप की छोटी चीज़ को दबाने में व्यस्त हो जाते हैं, तो हमारा तनाव भी कम होने  लगता है.

साथ ही, Bubble Wrap Popping आपके दिमाग़ को शांत रखने में भी मदद करती है. आपके दिमाग़ मे एक्स्ट्रा विचार नहीं आते. आपका मन केंद्रित होता है. मसलन, अगर आप कोई काम कर रहे हैं और उस दौरान बबल रैप भी फोड़ रहे हैं, तो आप अपने काम को और भी ध्यान से कर सकते हैं.

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इतना ही नहीं, बबल रैप फोड़ने से मांसपेशियों का तनाव भी कम होता है. मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट ई. थायर बताते हैं कि जब लोग तनावग्रस्त होते हैं, तो उन्हें किसी भी काम को समझने में टाइम लगता है. इस दौरान वो अनजाने में ही अपनी उंंगलियां दबाते हैं या फिर पैरों को हिलाते हैं. ऐसे में अगर वो बबल रैप फोड़ते हैं, तो वो कुछ समय में ही शांत महसूस करते हैं.

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बबल रैप फोड़ने की हमारी आदत का एक और दिलचस्प कारण है. दरअसल, बबल रैप के बबल फोड़ने पर हमारे दिमाग़ को सेक्स जैसी संतुष्टि महसूस होती है. एक प्रमुख पब्लिकेशन Deccan Chronicle ने इसे ऑटोनोमस सेंसरी मेरिडियन रिस्पॉन्स (ASMR) के रूप में परिभाषित किया है. बबल रैप फोड़ने पर हमारा दिमाग़ हैप्पी हार्मोन रिलीज़ करता है. वैज्ञानिकों ने इसे पुश्तैनी लत भी करार दिया है. क्योंकि जब इंसान किसी चीज़ पर अधिकार जमा लेता है, तो उसे संतुष्टि महसूस होती है. वैसे ही जैसे हमारे वानर पूर्वजों को कीड़ों को कुचलकर मज़ा आता था और हमें बबल रैप फोड़कर.

तो कुल जमा ये ही है कि बबल रैप फोड़ने की आदत हमारी संतुष्टि से जुड़ी है. हम ऐसा करने में मस्त हो जाते हैं. तनाव वाले हालातों में बबल्स को फोड़ने से हमारा तनाव कम होता है और हमें सुकून मिलता है.