आपने घर में देखा ही होगा कि जब भी LPG सिलेंडर आता है, तो वो बेलनाकार शेप में ही होता है. आजकल भी आप ऑक्सीज़न सिलेंडर को देखते हैं, तो उनका भी ऐसा ही शेप होता है. ऐसा कभी नहीं हुआ होगा कि चौकोर सिलेंडर देखने को मिला हो. यहां तक कि आपने टैंकर भी कभी चौकोर शेप में नहीं देखे होंगे. मगर आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?

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सभी गैस सिलेंडर बेलनाकार शेप में ही क्यों होते हैं?

अब चक्कर क्या है कि इंसान हो या फिर कंटेनर, हद से ज़्यादा प्रेशर बर्दाश्त नहीं कर सकता. सिलेंडर के भी गोल या बेलनाकार शेप के पीछे भी ये प्रेशर ही वजह है. दरअसल, जब किसी लिक्विड या गैस को किसी एक कंटेनर या टैंक में रखा जाता है तो सबसे ज़्यादा दबाव उसके कोनों पर बनता है. 

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ऐसे में अगर चौकोर सिलेंडर होंगे तो उनके चार कोने भी होंगे. ऐसे में उन पर सारा दबाव इकट्ठा होने लगेगा. अगर ऐसा हुआ तो प्रेशर की वजह से सिलेंडर में रिसाव होने या फटने का ख़तरा होगा. वहीं, गोल या बेलनाकार शेप का ये फ़ायदा है कि पूरे सिलिंडर में एक जैसा दबाव पड़ता है. यही वजह है कि सिलेंडर आपको कभी चौंकोर शेप में नहीं दिखेंगे. 

पूरी दुनिया में फ़ॉलो होता है ये रूल

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बता दें, दुनियाभर में सिलेंडर का शेप सेम ही रहता है. टैंकर के साथ भी ऐसा ही है. उनके बेलनाकार शेप की वजह से हर जगह दबाव एक जैसा रहता है. ऐसे में गैस या लिक्विड को एक जगह से दूसरी जगह पर इन सिलेंडर या टैंकरों की मदद से आसानी ले जाया जा सकता है. साथ ही, जब बेलनाकार शेप के टैंकर किसी वाहन पर लोड किए जाते हैं, तो इससे सेंटर ऑफ ग्रेविटी कम होता है और ट्रक या वाहन स्थिर रहता है. ऐसे में दुर्घटना होने का ख़तरा नहीं रहता. 

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ये नियम हर उस चीज़ पर लागू होता है, जिसमें गैस या लिक्विड को स्टोर किया जाता है. कुएं भी इसी वजह से गोल होते हैं. अगर कभी कोई चौंकोर कुंआ बन गया, तो फिर वो ज़्यादा दिन दबाव नहीं झेल पाता.