कई बार दोस्तों के साथ झगड़ा करने के बाद हम सोचते हैं कि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था, बात को संभाला जा सकता था. इसके बाद हम उस बारे में सोच-सोच कर अपना दिमाग़ ख़राब कर लेते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. क्योंकि ज़्यादा सोचना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होता है.

आइए जानते हैं क्यों…

1.Overthinking अवसाद की ओर ले जाती है

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किसी बात को लेकर अधिक चिंता करना आपको अवसाद ग्रस्त दे सकता है. इससे आप जल्द गुस्सा होने लगते हैं और चीज़ों को लेकर नकारात्मक सोचने लगते हैं. आप अपने अतीत से चिपके रहते हैं.

2. प्रोडक्टिविटी कम हो सकती है

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अधिक सोचने का असर आपकी प्रोडक्टिविटी पर भी पड़ता है. आप अपनी पढ़ाई पर फ़ोकस नहीं कर पाते या फिर अपने लक्ष्य से भी भटक जाते हैं.

3. ये हमेशा आपको नुकसान ही पहुंचाएगी

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आप अपने जोक पर न हंसने के लिए चिंता करेंगे या फिर क्रश के रिप्लाई न करने पर बार-बार फ़ोन चेक करेंगे. ये सारी बातें बस आपको तकलीफ़ ही देंगी. इससे आपके अंदर नकारात्मक ख़्याल ही आएंगे. जो अंतत: आपको नुकसान ही पहुंचाएगी.

4. इसे रोकना बहुत ही मुश्किल है

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Overthinking आपके लिए मुसीबत बन सकती है. अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो ये आदत बन जाएगी और इससे छुटकारा पाना आसान न होगा.

5. ये आपको मानसिक तौर पर थकाती है

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अधिक सोचने से आप का दिमाग़ जल्दी थक जाता है, जो आपको मानसिक तौर बीमार बनाता है. आप अपने मन में लोगों की ग़लत छवि बनाने लगते हैं और ख़ुद को रक्षात्मक बनाने लगते हैं. आप कुछ नया नहीं सीख पाएंगे.

6. समस्या का समाधान नहीं है Overthinking

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समस्या को हल करने के लिए एक तर्कसंगत विचार की ज़रूरत होती है, न कि Overthinking की. अधिक सोचने से आपको समस्या बहुत बड़ी दिखाई देने लगती है.

7. ये शारीरिक थकावट की ओर भी ले जाती है

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अधिक सोचने से मन अशांत होता है और शरीर उसे शांत रखने की कोशिश करता है. जैसे दिल की धड़कने तेज़ होना, तेज़ी से सांस लेना आदि. इस तरह तनाव के चलते आप जल्दी थक जाते हैं.

इसलिए जब भी आपको लगे की आप अधिक सोच रहे हैं, तो गहरी सांस लें और उस टॉपिक को वहीं छोड़कर आगे बढ़ जाएं. ये आपके साथ ही दूसरों के लिए भी बेहतर होगा.

अगर इससे भी काम ने चले तो अपना कोई मनपसंद काम करने लगें. ज़रूरत हो तो किसी डॉक्टर के पास जाने से न हिचकिचाएं.

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