संसद यानी देश का वो महत्वपूर्ण सभागार जहां बैठकर जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता विभिन्न क़ानून, नियमों व नीतियों के निर्माण के साथ जनता की शिकायतों को सामने रखते हैं. यहां मौजूद सरकार के साथ विपक्ष की भी अहम भूमिका होती है. संसद के दो सदन होते हैं, एक लोकसभा और एक राज्य सभा. हमारा ये आर्टिकल इन दो सदन से जुड़ी एक रोचक जानकारी पर आधारित है. 

वैसे आपने टीवी पर तो संसद के सत्र चलते देखे होंगे, लेकिन क्या कभी गौर किया है कि लोकसभा में हरी कारपेट और राज्य सभा में लाल कारपेट क्यों बिछाई गई है? नहीं न, तो चलिए हम आपको बताते हैं इस सवाल का जवाब. वहीं, इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण जानकारी आपको यहां मिलेंगी.

क्या है लोकसभा और राज्यसभा?

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जैसा कि हमने ऊपर बताया कि संसद के दो सदन होते हैं, एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा. इन दोनों सदनों में देश की जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता बैठते हैं. लोकसभा को संसद का निचला सदन कहा जाता है. वहीं, राज्यसभा को उच्च सदन कहा जाता है. लोकसभा जनता के बीच चुनाव के ज़रिए चुने गए प्रतिनिधियों (550 सदस्य) द्वारा बनती है, तो वहीं राज्यसभा में 245 सदस्य होते हैं, जिनमें से 233 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं और 12 राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाते हैं.

राजकुमारों का सदन  

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राज्यसभा को पहले राज्यों की परिषद कहा जाता है, तो वहीं लोकसभा को वैधानिक सभा. इनके अलावा भी एक सदन था जिसे राजकुमारों का सदन कहा जाता था. हालांकि, इस सदन को बंद कर दिया गया और उस स्थान को संसद की लाइब्रेरी बना दिया गया.  

क्यों लोकसभा में बिछाई गई है हरी कारपेट? 

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चलिये अब हम आपको बताते हैं कि लोकसभा में क्यों हरी कारपेट बिछाई गई है. दोनों सदनों में अलग-अलग रंगों की कारपेट बिछाने के पीछे की वजह दिलचस्प है. जैसा कि आपको पतो होगा कि लोकसभा के सदस्य सीधे जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए, ज़मीन से जुड़े होने के प्रतीक के रूप में यहां हरे रंग की कारपेट को बिछाया गया है. 

क्यों राज्यसभा में बिछाई गई है लाल कारपेट?

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जैसा कि हमने बताया कि राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और यहां जनता के बीच सीधे चुनाव के ज़रिए नहीं बल्कि प्रतिनिधी राज्यों के जन प्रतिनिधियों के आंकड़ों के हिसाब से आते हैं. वहीं, यहां लाल कारपेट बिछाने के पीछे दो वजह हैं. पहली ये कि लाल रंग राजसी गौरव का प्रतीक है और दूसरा ये कि लाल रंग को आज़ादी के लड़ाई में शहीद हुए वीरों के बलिदान का प्रतीक माना गया है.

जब साथ बैठते हैं सदस्य  

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लोकसभा में 550, तो राज्य सभा में 245 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की गई है. वहीं, जब संयुक्त सत्र चलता है, तो दोनों सदनों के सदस्यों को सेंट्रल हॉल में बैठाया जाता है.