Respiratory Therapy: सांस लेना हमें कोई नहीं सिखाता. ये ज्ञान हमारे सिस्टम में इनबिल्ट है. पर इस ज्ञान को बेहतर बनाने की ट्रेनिंग हमारी जिंदगी भी बेहतर बना सकती है. आइए, जानते हैं कैसे.

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Respiratory Therapy

इस वीडियो के ज़रिए आप समझ सकते हैं ठीक से सांस लेना शरीर के लिए कितना ज़रूरी है. चलिए सिलपिया स्टेपमयूलर से जानते हैं:

सिलपिया स्टेपम्यूलर 40 वर्षों से सांस लेने की ट्रेनिंग (Respiratory Therapy) दे रही हैं. क्लास में लोगों को सिखाती हैं कि ठीक से सांस कैसे लेना है वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद करना चाहती हैं ताकि वो सेहत के लिए कुछ कर सकें सही से सांस लेकर और बेहतर मुद्रा अपनाकर. वो कहती हैं,

Respiratory Therapy
सांस आपको आपके अवचेतन से जोड़ती है. सांस से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करके मैं अपनी मुद्रा और मनोदशा को प्रभावित कर सकती हूं. मैं अपनी मुद्रा से अपने मूड को भी प्रभावित कर सकती हूं और मूड के सहारे अपनी मुद्रा और सांसों की गति पर असर डाल सकती हूं. 
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सिलपिया मुश्किल अभ्यास (Respiratory Therapy) नहीं बताती हैं, बल्कि उनके पास एक टूलबॉक्स है, जिसमें सरल और रोज़मर्रा की टिप्स हैं. मसलन तनाव से निपटने के लिए. 

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तनाव होता है तो मैं ऐसे सांस लेती हूं. ऐसे जीव की तरह जो बेसुध भाग रहा हो और फिर शांत कैसे होती हूं अपनी पीठ पर या अपने पैर पर ध्यान लगाकर क्योंकि तनाव में मेरे पांव के नीचे की ज़मीन खिसक जाती है. एक दम यही महसूस होता है उस वक़्त मैं अपने पांव पर ध्यान लगाती हूं या अपने पैरों को महसूस करती हूं. थोड़े से अभ्यास से आप बेहतर महसूस करने लगते हैं. तेज़ी से सांसें लेने की जगह आप आराम से सांस छोड़ें.
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शूबी डूबी

जब आप अपने कंप्यूटर पर बैठे हों तो थोड़ी-थोड़ी देर में शूबी-डूबी करना अच्छा रहता है. यूं इस तरह जब मैं कुर्सी पर बैठकर अपने पेड़ू को एक किनारे से दूसरे किनारे इस तरह से घूमाती हूं या बच्चों की तरह अपने कूल्हे हिलाती हूं. शायद इससे लोग ज़्यादा आसानी से समझ सकें. इससे मेरे बीच का हिस्सा और पीठ का ऊपरी हिस्सा हल्का होगा. मेरी सांसों के साथ गति कर रहीं नसें अब पाइप की तरह ऐंठी हुई नहीं हैं. पाइप उलझी हुई हो तो उसमें सही तरह से पानी का बहाव नहीं होता इसलिए मैं सीधी बैठती हूं जब मैं झुक कर बैठी हूं तो भी कोई दिक्कत नहीं. मैं फिर से शूबी-डूगी कर लूंगी. 

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सुबह गहरी सांसें

सुबह उठकर केवल कमरे के जाले मत उतारिये अपने जाले भी हटाइए. अपनी बाहें फैलाइए. कुत्ते या बिल्ली की तरह अंगड़ाई लीजिए. शरीर के सारे अंगों को स्ट्रेच कीजिए. शोर मचाना अच्छा है क्योंकि शोर हमेशा सांस से निकलता है आप असल में अपने शरीर में हवा भर रहे होते हैं. 

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वो बताती हैं,

एक बार मुझे मेरे क्लाइंट ने कहा कि, मैं सुबह भरपूर सांस लेता हूं, मुझे इससे फ़ायदा होता है. मैंने कहा, बढ़िया है फिर तो आप बूढ़ें होंगे ही नहीं. 
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अब बताती हूं, आलसी लोगों के लिए सुबह की जिम्नास्टिक.

आप बस लेट जाएं और हाथ पेट पर रख लें. अपनी एक एड़ी नीचे की तरफ़ कीजिए फिर सीधा करें. अपने पांव को आराम करने दें. एड़ी खींचें और रिलैक्स करें. पहले पहल जह हम कुछ शुरू करने से पहले बेचैन होते हैं तो अक्सर ठीक से सांस छोड़ना बंद कर देते हैं. सांस छोड़ने के लिए आपके पास ढेर सारा समय है छोड़िए और खींचिए. जब भी आप सांस लें तभी गति शुरू करें. उस वक़्त आपको पेच की मांसपेशियों में हो रही गति महसूस होगी. इसे साफ़ देखा और महसूस किया जा सकता है. इससे पीठे के निचले हिस्से में भी गतिशीलता आती है, रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में. 
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सांस से जुड़ी सबसे अच्छे छोटी थेरेपीज़ (Respiratory Therapy) में से है जमाही लेना. इससे निचला जबड़ा रिलाक्स होता है. फिर मैं अपने आप पेट से सांस लेती हूं और अच्छे से सांस छोड़ते हुए बहुत सारा कार्बन-डाइ-ऑक्साइड निकाल देती हूं. 

अच्छी नींद

शाम को आप सांस लेने का थोड़ा अभ्यास कर सकते हैं जैसे आप प्रार्थना करते हैं फिर आप दिन भर तनाव लेकर बिस्तर पर नहीं जाते हैं. थोड़ा बहुत पढ़कर कुछ पी कर सो जाते हैं. जब आप उठेंगे तो पता लगेगा कि आपकी सांसें कितनी पैनी लग रही हैं, लेकिन फिर कभी न कभी आप सही से सांस छोड़ना सीख जाएंगे. तब आप लेटकर एक गहरी सांस ले सकते हैं और उसे छोड़ते हुए अपना सारा तनाव बाहर निकाल सकते हैं. कुछ लोगों को तो फिर किताब पढ़ने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती क्योंकि वो तुरंत सो जाते हैं. 

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आप ठीक से सांस लेकर कैंसर जैसी बीमारी नहीं ठीक कर सकते. दुनिया नहीं बदल सकते, लेकिन ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप चिड़चिड़े न रहें और आपको डॉक्टर के पास ज़्यादा न जाना पड़े. आप जीवन का लुत्फ़ उठा सकते हैं और शरीर को नुकसान से बचा सकते हैं.