इस दुनिया में कोई भी कभी भी ये नहीं चाहता है कि वो बेबस महसूस करे. शायद बेबस महसूस करने से बुरा भाव कोई हो नहीं सकता. आपको समझ में ही ना आए कि आपको करना क्या है. आगे कौनसा रास्ता लेना है.

परिवार में किसी की मृत्यु, नौकरी से अचानक हाथ धो बैठना, पार्टनर के साथ ब्रेक अप, मारपीट होना या रेप कुछ भी हो सकता है, जिसकी वजह से आप बेसहारा, कमज़ोर या बेबस महसूस करें. क्योंकि शायद से, ये वो स्थिति होती है जिनके लिए हम कभी भी तैयार नहीं होते हैं. कोई एक घटना भी हो सकती है या घटनाक्रम भी मगर हर लिहाज़ में आपको बस ये लगता है कि आपके बस में कुछ भी नहीं है आप एक दम निर्बल है.

आपके दिमाग़ में हमेशा ये दो बातें घूमती रहती है कि आपके हालात कभी नहीं सुधरेंगें और सब सही करने की कोशिश छोड़ देनी चाहिए.

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असहायता को आमतौर पर सीखी गई असहायता (Learned Helplessness) के तौर पर जाना जाता है. क्योंकि ये ऐसा भाव है जिसे हम तब महसूस करते हैं जब हम लंबे सनी तक के लिए किसी चीज़ से लड़ने की कोशिश कर रहे होते हैं मगर असफ़ल हो जाते हैं.

ख़ैर, इस असहाय भाव का हमारे दिमाग़ से गहरा नाता है.

सेरोटॉनिन (Serotonin) हमारे दिमाग़ में एक केमिकल है जो हमारे इमोशंस, हाल-चाल सब देखता है. जब भी हम असहाय महसूस करते हैं तो सेरोटॉनिन का रिसाव तेज़ हो जाता है जिससे की हम अच्छा महसूस कर पाएं.

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मगर उसी समय हमारे दिमाग़ का एमिगलाडा हिस्सा भी डर के कारण एक्टिवेट हो जाता है. ये डर होता है पहला तो जो परिस्थिति चल रही है उसका और दूसरा कि हम चीज़ें ठीक करने की कितनी भी कोशिश कर लें सब बेकार ही जाएंगी. तो इस डर के चलते जिस सेरोटॉनिन का रिसाव तेज़ी से हो रहा था अब वो एकदम से कम हो जाता है और हम ये भाव महसूस करते हैं.

Learned Helplessness आपके मेन्टल हेल्थ पर भी बुरा असर डाल सकती है. जो लोग Learned Helplessness महसूस करते हैं उनमें डिप्रेशन, स्ट्रेस और घबराहट के लक्षण भी देखे जा सकते हैं. तो अगर आपको लगता है कि अगर इस भाव का आप पर नेगेटिव प्रभाव पड़ रहा है तो तुरंत किसी काउंसलर को दिखाएं.