बिहार हमेशा से प्रकृति का दुलारा राज्य रहा है. इतिहास के कई अमिट चिन्ह, बिहार में आज भी अवशेष के रूप में मिलते  हैं.  मगध, पाटलिपुत्र, लिच्छवी, बोधगया, और नालंदा जैसे ऐतिहासिक स्थलों के अवशेष, लोगों को बिहार की ओर खींच लाते हैं. एक समय में बिहार, भारत का प्रतिनिधित्व करता था. आज भी ऐतिहासिक रूप से तो बिहार की स्थिति, वैसी ही है.

समृद्ध अतीत होने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से भी बिहार बहुत धनी है.

बिहार घूमने के लिए यहां की राजधानी पाटलिपुत्र यानि पटना से, नज़दीक उन जगहों की ओर चलते हैं, जहां जाकर मस्ती भी की जा सकती है और अपने इतिहास से भी जुड़ा जा सकता है.

1. नालंदा

पटना से 90 किलोमीटर की दूरी पर नालंदा है. नालंदा विश्व का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय था. पांचवी शताब्दी में स्थापित इस विश्वविद्यालय में दुनिया भर के दस हज़ार से ज़्यादा विद्यार्थी रहते और पढ़ाई करते थे.

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सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग भी यहां आया था. ह्वेनसांग ने अपनी किताब ‘क सी-यू-की’ में तत्कालीन भारत का विवरण लिखा है, जिसमें उसने नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में भी लिखा है.

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नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय बहुत समृद्ध था, जिसकी सारी किताबों को तुर्क सेनापति बख़्तियार ख़िलजी ने जला दिया था. अफ़गानी आक्रांता बख़्तियार खिलजी ने इसे, बारहवीं शताब्दी में तहस-नहस कर दिया.

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इस विश्वविद्यालय के अवशेष अब तक बचे हुए हैं. दुनिया भर के शोधार्थी और पर्यटक नालंदा विश्वविद्यालय देखने आते हैं.

2. राजगीर

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राजगीर पटना से महज़ 85 किलोमीटर दूर है. राजगीर प्राचीन बौद्ध स्तूपों की वजह से प्रसिद्ध है. यहां का गिद्धकूट पर्वत, बौद्ध तीर्थ यात्रियों के लिए बहुत पवित्र है. महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को यहां, कई दिनों तक उपदेश दिया था. इस पर्वत पर बना शान्ति स्तूप, पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. इस पर्वत पर चढ़ने के लिए Rope Way की व्यवस्था है.

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‘वेणुवन विहार’ बांस का जंगल है. लोग यहां घूमने आते रहते हैं. कहा जाता है कि बिम्बिसार ने भगवान बुद्ध के रहने के लिए वेणु वन बनवाया था. यहां गर्म पानी के झरने भी हैं. ब्रह्मकुंड का तापमान तो 47 डिग्री सेंटीग्रेट रहता है, मतलब अगर चावल डालो तो अपने आप उबल जाएगा.

3. रोहतास

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पटना से रोहतास की दूरी 146 किलोमीटर है. रोहतास का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है. सत्यवादी राजा हरिशचन्द्र के पुत्र, रोहिताश्व द्वारा बसाये ‘रोहतासगढ़’ के नाम पर, इस ज़िले का नाम रोहतास पड़ा. यहां के लोग मानते हैं कि रोहतास का किला, रोहिताश्व ने बसाया था.

इतिहासकारों का मानना है कि किले की चारदीवारी का निर्माण शेरशाह ने करवाया था, जिससे कोई किले पर हमला न कर सके.

यह किला बहुत भव्य है. 28 मील तक फ़ैला हुए इस किले में 83 दरवाज़े हैं, जिनमें घोड़ाघाट, राजघाट, कठौतिया घाट व मेढ़ा घाट सबसे प्रमुख हैं.

रोहतासगढ़ का किला बहुत विस्तृत है. यहां लोग गणेश मंदिर, हाथी दरवाज़ा, हैंगिंग हाउस, हाथिया पोल, आईना महल, हब्श खान का मक़बरा, जामा मस्जिद, दीवान-ए-ख़ास, दीवान-ए-आम, रोहतास मंदिर और देवी मंदिर देखने आते हैं. कैमूर की पहाड़ियों से निकलते झरने, रोहतास को और ख़ूबसूरत बना देते हैं.

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इसे ज़िले के मुख्यालय सासाराम में शेर शाह सूरी का मक़बरा है. 

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इसके अलावा हसन खान का मक़बरा, गणेश मंदिर, और मां तारा चंडी का मंदिर है, जिसे देखने लोग आते हैं.

5. वैशाली

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पटना से केवल 64 किलोमीटर की दूरी पर प्राचीन नगरी वैशाली बसी है. वैशाली का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है. इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा विशाल के नाम पर, इस नगर का नाम वैशाली पड़ा था.

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यहां एक पुराना टीला है जिसे ‘राजा विशाल के गढ़’ के नाम से जाना जाता है.

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यहां पर्यटक अशोक स्तम्भ, विश्व शांति स्तूप, सिंह स्तम्भ, आनंद स्तूप और राजा विशाल का गढ़ देखने आते हैं.

6. गया

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गया पटना से 107 किलोमीटर दूर है. गया हिन्दू संस्कृति का महत्वपूर्ण शहर है. यहां दर्शनार्थी विष्णुपद मंदिर देखने आते हैं, जहां गयासुर का वध करते समय भगवान विष्णु के पद चिन्ह बन गए थे.

गया में घूमने लायक जगहों में बिथो शरीफ़, सोन भण्डार, शिव मंदिर, कोटेस्वर नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, ब्रम्ह योनि पहाड़ी और मंगला गौरी मंदिर हैं. यहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थी आते रहते हैं.

7. बोधगया

बोधगया पटना से महज़ 111 किलोमीटर दूर है. ये बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है. बोधगया में ही भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था. यहीं से वे सिद्धार्थ से ‘बुद्ध’ बने थे.

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यहां के दर्शनीय स्थल हैं बोधि वृक्ष, महाबोधि मंदिर, तिब्बती मठ, राजगीर , Thai Monastery, मुचालिंदा लेक, डुंगेस्वरी गुफ़ा और बोधगया मल्टीमीडिया संग्रहालय.

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प्राचीन भारत को क़रीब से देखना और महसूस करना है तो ट्रिप बनाइये. पटना से नज़दीक ये जगहें भारत की प्राचीन विरासत को अपने अन्दर समेटी हैं. अगर सांसारिकता से ऊब चुके हैं, तो आपको कुछ पल यहां ज़रूर बिताने चाहिए.