इन दिनों एक दौर चल रहा है, जब रीमिक्स के नाम पर पुरानी फ़िल्मों और गानों को दोबारा बनाया जा रहा है. गानों और फ़िल्मों का नया रूप देख कर कई बार, तो दिल करता है कि इन्हें दोबारा बनाने वाले लोगों के पैर पकड़ लें और कहें कि आखिर क्यों? ऐसा क्यों किया तुमने? इसका हम शुक्र ही मना सकते हैं कि अब तक टेलीविज़न की दुनिया में इस रीमिक्स का साया नहीं पड़ा है. असल में इसे अपना स्वार्थ ही कहिये कि हम कुछ टेलीविज़न शोज़ को दोबारा बनते हुए देखना ही नहीं चाहेंगे, क्योंकि दोबारा बनाने के चक्कर में डायरेक्टर्स कहीं इनसे जुड़ी यादों को न धो डाले. आज हम कुछ ऐसे ही टेलीविज़न शोज़ को ले कर, जिन्हें हम कभी दोबारा बनता हुआ नहीं देख सकते.

देख भाई देख

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आज कॉमेडी का मतलब डबल मीनिंग डायलॉग और फूहड़ चुटकले सुनाना हो गया है, जिनका इस्तेमाल करके कई लोग ख़ुद को कॉमेडियन कहने लगे हैं. मगर 90s में एक ऐसा भी दौर था, जब DD Metro पर आने वाला शो 'देख भाई देख' इन सब चीज़ों का इस्तेमाल किये बिना भी लोगों को हंसाने में कामयाब था.

अंताक्षरी

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टाइम का खेल होने वाली अंताक्षरी, जब टेलीविज़न पर आई तब भी लोगों ने इसे अपना भरपूर प्यार दिया. अन्नू कपूर द्वारा होस्ट किये जाने वाले इस शो की सफ़लता का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि Zee TV पर इसके 11 सीज़न दिखाये गए थे.

तारा

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4 लड़कियों के बीच दोस्ती, प्रेम और सपनों को पूरा करने की कहानी थी तारा, जिसे लेकर उस समय काफ़ी विरोध भी हुआ था. इसके बावजूद Zee पर आने वाला ये शो लोगों के बीच बहुत पॉपुलर हुआ था.

Philips Top Ten

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आज रेडियो से ले कर कई टेलीविज़न चैनल अपने-अपने हिसाब से गानों को रैंकिंग देने में लगे हुए हैं, पर Philips Top Ten में सतीश कौशिक और पंकज कपूर की जोड़ी गाने से पहले जो माहौल बनाते थे उसकी बात ही अलग थी.

स्वाभिमान

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शोभा डे द्वारा लिखित और महेश भट्ट द्वारा निर्देशित 'स्वाभिमान' एक ऐसी महिला की कहानी थी, जो पति के मौत के बाद अपने अधिकारों के लिए लड़ते हुए दिखाई देती है.

सांस

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1998 में स्टार प्लस पर शुरू हुआ धारावाहिक 'सांस' पहला ऐसा टेलीविज़न शो था, जो Extramarital रिश्तों पर आधारित था.

आहट

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Sony पर आने वाला ये टेलीविज़न शो 20 सालों तक लगातार लोगों को डराने का काम करता था.

हसरतें

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मराठी उपन्यास 'अधांतरी' पर आधारित धारावाहिक 'हसरतें' जब Zee TV पर पहली बार आया, तो इसके डायरेक्टर अजय सिन्हा काफ़ी चिंतित थे. क्योंकि वो पहली बार एक ऐसी कहानी को टेलीविज़न पर दिखाने वाले थे, जो नाजायज़ रिश्तों की डोर पर केंद्रित थी, पर लोगों ने इस धारावाहिक को एक कहानी के तौर पर ही लिया.

जस्सी जैसी कोई नहीं

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ये टेलीविज़न इतिहास में शायद पहला ऐसा शो था, जिसने महाभारत और रामायण के बाद सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियां बटोरी थीं. इस शो में जस्सी का किरदार निभाने वाली मोना सिंह जब अपने असल रूप में एक अवॉर्ड फंक्शन में पहुंची थी, तो लोग जस्सी-जस्सी ही चिल्लाने लगे थे.

कोरा कागज़

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इस शो के ज़रिये आशा पारेख ने अपने टेलेविज़न करियर की शुरुआत की और पर्दे के पीछे रह कर शो की निर्माता बनी. रेनुका शहाणे ने इस शो में एक महिला का किरदार निभाया, जो पति द्वारा छोड़े जाने के बाद ख़ुद के पैरों पर खड़ी होती है.

Star Bestsellers

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90 के आखिरी दशक में स्टार प्लस पर प्रसारित हुआ Star Bestsellers असल में नए निर्देशक-लेखक और अभिनेताओं के लिए एक प्लेटफॉर्म था. इसका हर एपिसोड नए किरदारों के साथ नई कहानी कहता था. anurag kashyap, tigmanshu dhulia jaisey directors ne is yahaan se safalta ka swad chakha tha.

Stories by Rabindranath Tagore

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मशहूर डायरेक्टर अनुराग बासु ने रबीन्द्रनाथ टैगोर की कुछ कहानियों को चुन कर टेलीविज़न शो के रूप में डाला और उन्हें Epic चैनल के ज़रिये प्रसारित किया. इसका हर एपिसोड एक मील के पत्थर की तरह था.

इन सब के अलावा भी कुछ और ऐसे टेलीविज़न शोज़ हैं, जिन्हें आप भी दोबारा बनता हुआ नहीं देखना चाहेंगे, तो भाई अपने प्यार को दिखाइए और उन शोज़ के नाम बताइये.