भारत एक समय में राजा महाराजाओ का देश रहा है. कई राजा पूरे विश्व में चर्चित हुए, तो कई अपने कमजोर शासन और कम लोकप्रियता की वजह से गुमनामी के अंधेरे में डूब कर रह गए. पर हमारे देश की सरज़मीं पर ऐसे भी कई राजा और रानियां हुए हैं, जिनके किस्से पूरी दुनिया में अब भी सुनाये जाते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी रानी की कहानी, जो बला की खुबसूरत होने के साथ-साथ बड़ी समझदार भी थीं. ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि बचपन से राज-घराने में पली बढ़ी एक राजकुमारी सब त्याग करने के लिए तैयार हो जाए. बात हो रही है जयपुर के पुराने घराने की रानी गायत्री देवी की. इनका जन्म बंगाल युवराज के छोटे भाई जीतेन्द्र नारायण और बड़ौदा की राजकुमारी इंदिरा राजे के घर में हुआ. विदेशों में शिक्षा पाने के बाद जब गायत्री वापस लौटीं, तो उनका विवाह जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह(द्वितीय) से हुआ.

इनकी सुंदरता की कायल थी पूरी दुनिया

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Vogue मैगज़ीन में रानी गायत्री देवी को दुनिया की दस सबसे खूबसूरत महिलाओं की लिस्ट में स्थान दिया गया था. गायत्री देवी एक बेहतरीन राइडर थीं और एक शानदार पोलो खिलाड़ी भी. उन्हें गाड़ियों का बहुत शौक था. भारत में पहली Mercedes कार गायत्री देवी ही लेकर आयी थीं. उनके पास कई लक्ज़री गाड़ियां थी और एक शानदार एयरक्राफ्ट भी.

राजनीति में बेहद सक्रिय थी महारानी

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उनके पति के हस्ताक्षर के बाद जब जयपुर का भारत में विलय हुआ, उसके बाद से वो राजनीति में बेहद सक्रिय रहने लगीं. 1962 में महारानी ने पहला पार्लियामेंट चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड वोटों से विजयी हुईं. उन्हें 2,46,516 वोटों में से 1,92,909 वोट मिले थे, ये रिकॉर्ड गिनीज़ बुक में अब तक दर्ज़ है. ऐसे ही उन्होंने 1967 और 1971 में शानदार जीत हासिल की. सी. राजगोपालाचारी द्वारा स्वतंत्रता पार्टी बनाए जाने के बाद गायत्री देवी उसमें शामिल हो गयीं. फिर एक मीटिंग के दौरान लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे वापस कांग्रेस में आने की अपील की, पर महारानी अपने इरादों से नहीं डिगीं.

एमरजेंसी के दौरान देखना पड़ा जेल का मुंह

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एक राज घराने की महारानी को इमरजेंसी के दौरान जेल भी जाना पड़ा. उन पर टैक्स नियम का उल्लंघन करने का झूठा मुक़दमा दर्ज़ किया गया था. उन्हें 5 महीने तिहाड़ जेल में बिताने पड़े. महारानी गायत्री देवी की ज़िंदगी पर संता रामा राव नाम के एक लेखक ने एक किताब 'A Princess Remembers' भी लिखी. फिर उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया. पर 1999 में ऐसी अफ़वाह उड़ाई गयी कि वो राजनीति में वापसी कर रही हैं. उन्हें कूच विहार से तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने टिकट देने की बात की, पर उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया.

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29 जुलाई 2009 को 90 साल की उम्र में Lung's Failure के कारण इनकी मौत हो गयी. आज गायत्री देवी को उनके अच्छे कामों के लिए याद किया जाता है. उन्होंने अपने नाम पर एक स्कूल खोला था, जो जयपुर के अच्छे स्कूलों में शुमार है. महिलाओं को उन्होंने एक हौसला दिया कि वो अब घर में रखी जानी वाली वस्तु नहीं है. आज भी महारानी गायत्री देवी के सराहनीय कार्यों को और उनकी खूबसूरती को लोग याद करते नहीं थकते.

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