करीब एक महीने पहले तक गुजरात के शाहीबाग में स्थित महात्मा गांधी स्मृति खंड (स्मारक) में कुछ मिनट बिताना और किसी के लिए भी सुखद और सुकून बार अनुभव होगा. लेकिन अगर अब आप वहां जायेंगे तो आपका स्वागत महात्मा गांधी स्मृति की जगह वहां चारों तरफ फैले पड़े पतंजलि घी, कालीन, बैनर और पर्चे करेंगे.

95 वर्ष पहले ब्रिटिश शासन काल में इस सर्किट हाउस, जहां ये स्मृति खंड स्थित है, को कोर्ट रूम के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. ये वही अदालत थी, जहां 18 मार्च, 1922 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को राष्ट्रद्रोह के आरोप के तहत 6 सालों की कैद की सज़ा सुनाई गई थी. मगर आज़ादी से पहले की कई कहानियों को अपने में समेटे हुए ये स्मृति खंड आज योग गुरु बाबा रामदेव की आयुर्वेद की दवाइयों की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड में परिवर्तित हो चुका है.

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पिछले महीने की 25 मई से पुराने शहर के सर्किट हाउस के 28 कमरों में से 12 कमरे पतंजलि को दे दिए गए हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्मृति खंड के 12 कमरों का ये हिस्सा अब केवल एक बड़े कमरे में परिवर्तित हो चुका है. इस जगह पर पतंजलि के कर्मचारी आने वाले योग दिवस की तैयारी में जुटे हुए हैं.

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DNA में पब्लिश हुई खबर के अनुसार, अहमदाबाद सर्किट हाउस के इनचार्ज और शाहीबाग के सब-डिविज़न डिप्टी एग्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर चिराग पटेल से जब पूछा गया कि स्मृति खंड को इस तरह से इस्तेमाल करने की अनुमति पतंजलि को कैसे मिली. तब चिराग पटेल ने बताया, ‘हमें नहीं पता कि पतंजलि को इसके इस्तेमाल की अनुमति कैसे मिली.’
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इतना ही नहीं डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने भी इस तरह की किसी भी जानकारी होने से साफ़ इंकार कर दिया. स्मृति खंड वो जगह है, जहां महात्मा गांधी से सम्बंधित फ़ाइल्स और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को संरक्षित किया गया है. ब्रिटिश काल के दौरान इस सर्किट हाउस को एक कोर्ट रूम की तरह प्रयोग किया जाता था. 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद इसे गांधी स्मृति खंड बनाया गया. यहां महात्मा गांधी की तस्वीरों, पेंटिंग, फाइलें और गांधी से जुड़े पेपर्स को रखा गया है.

बीते शनिवार को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पतंजलि ने इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही होने से इंकार करते हुए कहा कि स्मृति खंड में पतंजलि को कुछ भी सामान नहीं रखा गया है. जब चाहे तब कोई भी वहां जाकर इसकी जांच कर सकता है.

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