लगता है दुनिया इतने सालों में ज़्यादा बदली नहीं है, उसके अहसास अभी भी वही हैं, उसके अंदाज़ अभी भी वही हैं. या फिर सालों पहले जो बिरले हुए, उन्होंने दुनिया को अपने जज़्बात, अपनी कलम और अपने ख्यालातों में ऐसा निचोड़ा कि सालों बाद उनकी बातों को बासीपन चाह कर भी नहीं छू पाया.

सालों पहले मौलाना जलालुद्दीन मुहम्मद, या रुमी ने कुछ ऐसा लिख दिया था कि हम आज भी उसे पढ़ते हैं और उससे अपने जीवन को जोड़ कर देखने की कोशिश करते हैं. 13वीं शताब्दी के फ़ारसी पोएट और विचारक, रुमी को आज दुनिया भर में पढ़ा जाता और उनके Quotes इंस्पिरेशन और मोटिवेशन के लोए इस्तेमाल होते हैं.

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रूमी के जन्म, परवरिश, उनकी लेखनी और कामयाबी के बारे में ज़्यादातर बातें आपने पढ़ी होंगी, लेकिन आप जानते हैं, वो कौन आदमी था जिसने मौलाना जलालुद्दीन मुहम्मद को आज का रूमी बनाया?

Quora पर शुरू हुए इस सवाल का जवाब बहुत से लोगों ने दिया.

उस इंसान का नाम था शम्स-अल-तब्रिज़. तब्रिज़ ने ही तुर्की में बादशाह के कोर्ट में एक मौलाना को रुमी बनाया. लेकिन ये हुआ कैसे? दोनों के पहले एनकाउंटर के बारे में बहुत-सी कथाएं प्रचलित हैं.

तब्रिज़ ईरान के बहुत बड़े सूफ़ी संतों में से एक था. एक दिन वो रूमी को शहर में फिरता हुआ मिला. उसने से क़ुरान में लिखी कुछ बातों के बारे में सवाल पूछ लिए. इन सवालों के जवाब मौलाना और सब कुछ जानने वाले रूमी के पास नहीं थे. बस उसी दिन से रूमी शम्स की शरण में चले गए और उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु बना लिया. कहा जाता है कि शम्स ने रूमी को 40 दिनों तक, अकेले और एकांत में ज्ञान दिया था. इन 40 दिनों ने रूमी को बदल कर रख दिया.

लेकिन लोगों को रूमी और शम्स की दोस्ती पसंद नहीं आई. शम्स को कोन्या (टर्की) छोड़ने की धमकी दी गयी. लोगों ने शम्स को एक ढोंगी कहा और इस बात से परेशान हो कर शम्स ने रूमी को छोड़ दमस्कस जाने का निर्णय किया. उसने उसी वक़्त रूमी को कुछ भी पढ़ाने से मना कर दिया. दोनों के बीच इस सेपरेशन का ज़िक्र रूमी ने अपनी कविताओं में कई दफ़ा किया है. यहां पर आपको रूमी के प्रेमी रूप का आभास होगा.

हालांकि शम्स को दोबारा ढूंढ लिया गया और उसे वापस कोन्या लेकर आया गया. लेकिन वो एक आज़ाद पंछी था, वो कहां रुकने वाला था. कुछ ही दिनों में वो गायब हो गया. किसी ने कहा कि उसे कोन्या के लोगों ने मरवा दिया था, किसी का कहना था कि ईरान जा कर उसकी मृत्यु हो गयी थी.

शम्स के रूमी की ज़िन्दगी से जाने के बाद ही रुमी ने उस प्रेमी और प्यार से भरे कवि और विचारक का रूप अपनाया और वो सब लिखा, जिसे पढ़ कर आज हम उनके कायल होते हैं.

रूमी की कविताओं में शम्स को उन्होंने एक पंछी, सूरज, या ख़ुदा के रूप में संबोधित किया है.

कई लोग कहते हैं कि रूमी शम्स का वो साथी था, जिसकी तलाश उन्हें कई समय से थी. रूमी अपनेआप में शम्स का मिशन थे. कई लोग तो ये भी कहते हैं कि शम्स को रूमी के छोटे बेटे ने ही मरवाया था और कुछ लोगों ने उनके भारत में भी होने की बात कही. लेकिन ये एक गुरु और उसके शिष्य का बिछोह ही था, जिसने रूमी की कलम को तेज़ धार दी.

इसके कुछ समय बाद ही रूमी ने जीवन, प्रेम, ज्ञान पर लिखना शुरू किया और हम उसे आज तक पढ़ रहे हैं.

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