रचित अरोड़ा एक के बाद एक पर्वतों को फ़तह कर रहे हैं और इसके पीछे की वजह बेहद नेक है. वो अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं महिला सशक्तिकरण का सन्देश फैलाने के लिए. इसके लिए वो अपने ही पैसों का इस्तेमाल करते हैं.

रचित एक ऑइल एंड गैस कंपनी में HR ऑफ़िसर के तौर पर काम करते हैं और पर्वतारोही के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं. वो वंचित महिलाओं का उत्थान करने के लिए इसके ज़रिये पैसे जुटाते हैं.

देहरादून में जन्में और पले-बढ़े रचित अरोड़ा बचपन से ट्रैकिंग करते आये हैं. अब वो अपनी खुद की ट्रेकिंग कम्पनी खोल चुके हैं. वो हमेशा से समाज के लिए कुछ करना चाहते थे. मुंबई आने के बाद वो 'Aftertaste' नाम के एक NGO से जुड़े, जो ज़रूरतमंद महिलाओं को पढ़ा कर और उन्हें हेंडीक्राफ्ट सिखा कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करता है.

अरोड़ा अगले कुछ वर्षों में Sseven Summits की चढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं. इस साल वो रूस के सबसे ऊंचे पर्वत Mount Elbrus पर चढ़े थे. इससे जुटाए गए पैसों से उन्होंने 22 महिलाओं के लिए एक छोटा सा व्यवसाय शुरू करवाया है.

वो कम से कम 100 महिलाओं की ज़िन्दगी में इस तरह का बदलाव लाना चाहते हैं. वो एक साथ अपने दोनों कामों में अच्छा कर रहे हैं.

वो बताते हैं कि कई लोग उनसे नौकरी छोड़ कर अपने घूमने के सपने को पूरा समय देने के लिए कहते हैं. आज कल नौकरी छोड़ कर अपने पैशन के पीछे निकल जाने का ट्रेंड सा बन चुका है, लेकिन एक आम घर से ताल्लुक रखने वाले किसी भी इंसान के लिए ये मुमकिन नहीं है. पर्वतारोहण एक महंगा सपोर्ट है. वो इसमें ज़्यादा समय देने की चाहत रखते हैं.

2020 तक वो माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ना चाहते हैं. वो कहते हैं कि इस तरह काम करने की सबसे अच्छी बात ये है कि आप अपना पैशन भी जी लेते हैं और लोगों की मदद भी कर पाते हैं.

Source: Indiatimes